Pilibhit News: 382 गांवों में बनने थे आरआरसी, 91 गांवों में जमीन ही नहीं मिली

ग्राम पंचायत में बना आरआरसी सेंटर । स्रोत – पंचायत विभाग
ओडीएफ प्लस-चरण टू मॉडल : दो माह से गांवों में हो रही जमीन की तलाश
पीलीभीत। शासन के निर्देश पर जिले में ओडीएफ प्लस-चरण दो के तहत 382 में से 91 गांवों में जमीन नहीं मिल पाने के कारण रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) का निर्माण नहीं हो सका। जबकि एक सेंटर के लिए सिर्फ 15 सौ वर्ग मीटर जमीन की जरूरत थी, जिसको अफसर नहीं ढूंढ सके।
स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत वर्ष 2022-23 में ओडीएफ के लिए 31 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया था। इसके तहत 1.39 करोड़ रुपये से गांवों में स्वच्छता संबंधित कार्यों को पूरा कराया गया।
इसके बाद शासन ने वर्ष 2023-24 में 382 और गांवों को ओडीएफ प्लस के तहत चयनित किया। इनमें प्रति आरआरसी 1500 वर्गमीटर जमीन की जरूरत थी, साथ ही मॉडल का दर्जा दिया जाना था। इन गांवों में भी स्वच्छता से संबंधित कार्यों को किया जाना था।
बावजूद इसके चयनित गांवों में से 91 ग्राम पंचायतों में अब तक आरआरसी सहित अन्य निर्माण कार्यों के लिए जमीन नहीं मिल सकी। ऐसे में इन ग्राम पंचायतों में स्वच्छता से संबंधित कार्य शुरू नहीं हो सके।
यहां बता दें कि जमीन की उपलब्धता को लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी के पत्र पर जिलाधिकारी ने सभी उप जिला अधिकारियों को संबंधित ग्राम पंचायत में जमीन उपलब्ध कराने के आदेश दिए लेकिन दो माह में जमीन नहीं मिल सकी। ऐसे में गांव में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए रिसोर्स रिकवरी सेंटर का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। (संवाद)
ओडीएफ प्लस- चरण दो के लिए चयनित गांवों में स्वच्छता संबंधी कार्य करवाने के लिए शासन की ओर से 30.46 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी की गई थी। इसमें 91 ग्राम पंचायतों को छोड़कर शेष गांवों में काम करवा दिया गया है। इन गांवों में कुल धनराशि का 10 करोड़ रुपये खर्च हो चुका है। अब शेष धनराशि से शेष गांवों में काम होना है।
इन तहसीलों के गांवों में नहीं मिली जमीन
डीएम की ओर से एसडीएम को जमीन उपलब्ध कराने के लिए जो आदेश जारी किया गया है। उसमें अमरिया तहसील के 14, बीसलपुर के 23, सदर तहसील के 24, कलीनगर के 12 और पूरनपुर तहसील के 18 गांवों में जमीन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
ये होने हैं काम
ओडीएफ प्लस के तहत गांवों में आरआरसी, वर्मी कंपोस्ट, कूड़ादान, कूड़ा गाड़ी, नाले और नालियां बनाना, सोक पिट, खाद के गड्ढे, सिल्ट कैचर और फिल्टर कैचर का काम होना है। इसी पर धनराशि खर्च होनी है।
आरआरसी के लिए गांवों में जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिससे निर्माण नहीं हो पा रहा। अन्य जगह कार्यों को करवाया जा रहा है। जिलाधिकारी की ओर से सभी एसडीएम को पत्र भी जारी किया गया है।
– सतीश कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी

ग्राम पंचायत में बना आरआरसी सेंटर । स्रोत – पंचायत विभाग