Pilibhit News: माधोटांडा क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी से बिगड़ सकते हैं हालात

जमुना प्रसाद ।
कलीनगर। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल से सटे इलाकों में इंसानी जिंदगी पर मंडराते बाघ के हमले को देखकर अब वहां हालात बिगड़ने लगे हैं। छह महीने में एक के बाद एक चार लोगों की बाघ के हमले से हुई मौत के बाद अब ग्रामीणों का गुस्सा उफान पर है। तीन दिन पूर्व बाघ के हमले में एक किसान की जान जाने के बाद गुस्साए लोगों का जाम लगाना, पुलिस की गाड़ी में तोड़फोड़ और पथराव करना इसी आक्रोश की बानगी भर थी। बावजूद इसके अब तक वन विभाग की कोई सक्रियता नजर नहीं आ रही है।
पीलीभीत के जंगल को टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने के बाद से ही बाघों के लिए यहां अनुकूल वातावरण मिल रहा है। इससे उनका कुनबा लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही बढ़ रहीं हैं मानव से संघर्ष की घटनाएं। जंगल में मानव की दखलंदाजी तो बंद है, लेकिन बाघों का जंगल से बाहर आकर आबादी क्षेत्र में विचरण करना नहीं रुक पा रहा है। बाघों की बढ़ती संख्या के साथ उनकी सुरक्षा और मानव से संघर्ष के हालात पर नियंत्रण के लिए विभागीय स्तर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
नतीजतन बाघ जंगल से बाहर निकलकर लोगों पर हमले कर रहे हैं। महोफ, माला और बराही के जंगल से बाहर निकलकर बाघ माधोटांडा क्षेत्र के मथना जपती, रानीगंज, जमुनिया, बांसखेड़ा पिपरिया संतोष गांव की आबादी क्षेत्र के आसपास घूम रहे हैं। गन्ने के खेत बाघों की शरणस्थली बन गए हैं। छह माह के अंतराल में रानीगंज, जमुनिया समेत क्षेत्र में चार लोगों की बाघ के हमले में मौत हो चुकी है। महीना भर पहले आबादी क्षेत्र में डेरा जमाए बाघिन को वन विभाग ने पकड़ा भी। बावजूद इसके स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है।
ग्रामीण बोले- जल्द तारबंदी की जाए तभी मिलेगी राहत
क्षेत्र में पिछले कुछ माह से बाघों की चहलकदमी बढ़ी है। कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। विभाग को जल्द ही जंगल सीमा पर तारबंदी करनी चाहिए। जिससे कुछ राहत मिल सके। आबादी के निकट बाघों के घूमने से खतरा बढ़ रहा है। – गुरदीप सिंह गोगी
तीन माह से बाघ की दहशत कम नहीं हो रही है। रोजाना बाघ खेतों में घूमता दिखाई दे रहा है। विभाग को ठोस रणनीति बनाकर अमल करने की जरूरत है। जिससे ग्रामीण को राहत मिल सके। – जमुना प्रसाद
.
मथना जपती और उससे सटे क्षेत्र में जंगल सीमा पर जल्द ही तारफेंसिंग का कार्य शुरू कराया जाएगा। बाघों की जंगल के बाहर मौजूदगी को गंभीरता से लिया जा रहा है। – नवीन खंडेलवाल, डीएफओ पीटीआर।
ये हुईं घटनाएं
28 जून – लालता प्रसाद – रानीगंज माधोटांडा
16 अगस्त – राममूर्ति – रानीगंज
26 सितंबर – तोताराम – जमुनिया
11 नवंबर – ओमप्रकाश पासवान – जमुनिया

जमुना प्रसाद ।

जमुना प्रसाद ।