पीलीभीत

Pilibhit News: अंगद-रावण संवाद का मंचन

Connect News 24

Staging of Angad-Ravan dialogue

पूरनपुर रामलीला मेले में लीला का मचंन करते कलाकार । स्रोत- नाटक कंपनी

पीलीभीत। रामलीला मैदान पर चल रही रामलीला में शनिवार को विभीषण शरणागति, सेतुबंध रामेश्वर स्थापना एवं अंगद-रावण संवाद लीला का मंचन किया गया।

लीला के दौरान दिखाया गया कि विभीषण की श्रीराम भक्ति से नाराज रावण उनको देश निकाले का फरमान सुनाता है। इसके बाद विभीषण प्रभु श्रीराम के पास पहुंचते हैं। श्रीराम उनको अपनी शरण में ले लेते हैं। इसके बाद वानर सेना के साथ श्रीराम-लक्ष्मण समुद्र के किनारे जाते हैं और समुद्र से रास्ता मांगते हैं।

काफी विनती के बाद भी जब समुद्र रास्ता नहीं देता है तो क्रोधित होकर श्रीराम अपने धनुष पर बाण चढ़ाते हैं। डरा हुआ समुद्र श्रीराम के समक्ष प्रकट होता है और क्षमा प्रार्थना करता है। साथ ही मार्ग भी देता है।

इसके बाद श्रीराम समुद्र तट पर ही भगवान शंकर का पूजन कर रामेश्वरम की स्थापना करते हैं इसके बाद वानर सेना समुद्र पर पत्थर का पुल बनाती है और सभी लंका पहुंच जाते हैं।

इसके बाद राम अंगद को दूत बनाकर लंका भेजते हैं। अंगद दरबार में पहुंचते हैं और रावण से संवाद करते हैं। अंगद शर्त रखते हैं कि कोई मेरा पैर टस से मस कर दे तो मैं मान जाऊंगा कि आप श्रीराम को पराजित कर सकते हैं।

कोई भी अंगद का पैर नहीं हिला पाता। रावण पांव डिगाने के लिए उठता है तो अंगद समझाते हैं कि अगर आप मेरी जगह श्रीराम का पैर पकड़ते तो आपका कल्याण हो जाता।

इस मौके पर महंत ओमकार नाथ, सुनील मिश्रा, भानु प्रताप सिंह, केशव सक्सेना, अमरीश शर्मा, संजीव मिश्रा, रमाकान्त पांडेय, अमित जौहरी, आकाश कश्यप आदि उपस्थित रहे। संवाद

0000

बीसलपुर में शबरी लीला, सुग्रीव मित्रता और बालि वध का मंचन

बीसलपुर। नगर की रामलीला में शनिवार को शबरी लीला, सुग्रीव मित्रता और बालि वध का मंचन हुआ।

लीला में दर्शाया गया कि भगवान राम और लक्ष्मण, सीता जी को ढूंढते हुए वन में शबरी के आश्रम पर पहुंचते हैं । भगवान राम को अपनी कुटिया में देखकर शबरी फूली नहीं समातीं। शबरी ने उनकी सेवा में बेर रखतीं हैं। भगवान राम और लक्ष्मण खट्टे बेर न खा पाएं, इस वजह से शबरी खिलाने से पहले बेरों को चखती हैं ।

लक्ष्मण शबरी द्वारा दिए गए बेर नहीं खाते और फेंक देते हैं। भगवान राम, शबरी के प्रेम को देखते हुए उनके दिए गए सभी जूठे बेर खा लेते हैं। कुछ दूर चलने के बाद वह किष्किंधा राज्य में पहुंचते हैं, जहां उनकी सुग्रीव से मुलाकात होती है। यहां भगवान राम, बालि का वध करते हैं। मरने से पहले बालि और भगवान राम का संवाद भी होता है। बालि अपनी मृत्यु का कारण पूछता है तो भगवान राम उसे संतुष्ट कर देते हैं। संतुष्ट होने के बाद बालि दम तोड़ देता है। यहीं पर लीला को विराम दिया जाता है। संवाद


ताड़का और सुनाद वध का मंचन

पूरनपुर। रामलीला मेले में शनिवार को ताड़का और सुनाद वध की लीला का मंचन किया गया।

बिहार की नाटक कंपनी के कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि विश्वामित्र मुनि ताड़का की जानकारी श्रीराम को देते हुए बताते हैं कि ताड़का ऋषियों को यज्ञ नहीं करने देती। भगवान श्रीराम ताड़का को जगाकर वध कर देते है। तब मुनि विश्वामित्र राम को एक अस्त्र देते हैैं। बताते हैं कि जब तक अस्त्र उनके पास रहेगा। रणभूमि में कभी भूख-प्यास नहीं लगेगी। कोई वीर उनको पराजित नहीं कर पाएगा। उधर राक्षसों को ताड़का का वध होने की जानकारी पर मारीच के साथ सुनाद आदि राक्षस पहुंचते है। भगवान श्रीराम मारीच को बगैर फल का बाण मारकर दूर फेंक देते है। जबकि सुनाद अन्य राक्षसों का वध कर देते है। रामलीला मंचन के दौरान कई बार दर्शकों ने जयश्रीराम के नारे लगाए। संवाद

पूरनपुर रामलीला मेले में लीला का मचंन करते कलाकार । स्रोत- नाटक कंपनी

पूरनपुर रामलीला मेले में लीला का मचंन करते कलाकार । स्रोत- नाटक कंपनी

पूरनपुर रामलीला मेले में लीला का मचंन करते कलाकार । स्रोत- नाटक कंपनी

पूरनपुर रामलीला मेले में लीला का मचंन करते कलाकार । स्रोत- नाटक कंपनी


Connect News 24

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button