पीलीभीत

Pilibhit News: ग्रामीण बोले- नरभक्षी है बाघ, पकड़ो वरना हम पर छोड़ो

Connect News 24

The villagers said - the tiger is a cannibal, catch it or else leave it on us

घटनास्थल पर लगी ग्रामीणों की भीड़। संवाद

पीलीभीत। बाघ के हमले में किसान लालता प्रसाद की मौत से ग्रामीण और परिजन बेहद गुस्से में थे। सुबह ही उन्होंने ट्रैक्टर-ट्रॉली पीलीभीत-माधोटांडा रोड पर खड़ी कर जाम लगा दिया। इसके बाद कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। हालात न संभले तो पीएसी को भी बुला लिया गया। ग्रामीणों ने वन विभाग के अफसरों को खूब खरीखोटी सुनाई। अधिकारियों से उनकी तीखी नोकझोंक हुई।

ग्रामीण इस बात को लेकर ज्यादा आक्रोशित थे कि रात में ही वन चौकी पर सूचना देने के बावजूद कोई नहीं आया। ग्रामीण बाघ को नरभक्षी घोषित कर पकड़ने की मांग पर अड़ गए। बोले- बाघ नरभक्षी हो गया है। वन अफसर बाघ को पकड़ें वरना हम पर छोड़ दें। इसके साथ ही लालता प्रसाद के परिवार के एक युवक को नौकरी और मुआवजे देने की मांग की। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए।

सुबह लालता प्रसाद का शव मिलने के बाद ग्रामीणों ने माधोटांडा रोड पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी करके जाम लगा दिया। जानकारी होते ही पुलिस फोर्स व पीएसी को बुला लिया गया। वन विभाग के अफसराें के पहुंचने पर ग्रामीण भड़क गए। अफसरों व कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। बोले- एक एक कर लोग मर रहे हैं और अफसर कुछ नहीं कर रहे।

किसान लालता प्रसाद जिस खेत को धान की रोपाई के लिए तैयार करने गए थे, वह आबादी से महज 100 मीटर की दूरी पर है। लालता प्रसाद की मौत के बाद गांव वालों के जाम लगाने की खबर मिलने पर किसान नेता गुरदीप सिंह भी पहुंच गए। लालता प्रसाद के परिजनों और ग्रामीणों का कहना था कि दो किलोमीटर दायरे में जंगल की सीमा होने के चलते अक्सर वन्य जीवों की चहलकदमी बनी रहती है। बाघ भी जंगल से बाहर आ जाते हैं। इसे लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया। तार फेंसिंग की भी मांग की गई, लेकिन फेंसिंग नहीं कराई गई।

मंगलवार रात लालता प्रसाद को मारने के बाद भी बाघ क्षेत्र में ही घूमता रहा। ट्रैक्टरों और अन्य संसाधनों से ग्रामीण बाघ को खदेड़ने के प्रयास में जुटे रहे। सुबह तड़के बाघ जंगल की ओर गया। ग्रामीणों का कहना था कि जिस तरीके से बाघ ने लालता के शव को खाया है, उससे साफ है कि वह नरभक्षी हो चुका है। ग्रामीणों की मांग कि वन विभाग बाघ को नरभक्षी घोषित कर तत्काल पकड़े, वरना स्थिति और खराब हो जाएगी।

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आठ दिन से देखी जा रही थी चहलकदमी, गंभीर नहीं हुआ वन विभाग

रानीगंज, मथना जपती आदि इलाकों के ग्रामीणों का कहना है कि बाघ की आठ दिन से क्षेत्र में चहलकदमी देखी जा रही थी। तीन किलोमीटर के दायरे में बाघ चहलकदमी कर रहा था। इसकी जानकारी वन विभाग को भी दी गई थी, लेकिन निगरानी के नाम पर महज औपचारिकता निभाई जाती रही। नतीजतन बाघ ने मंगलवार रात किसान लालता प्रसाद को खेत में पहुंचकर अपना शिकार बना लिया।

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विरोध के बाद लगाया गया पिंजरा और कैमरे

ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद वन विभाग की ओर से बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया। इसके अलावा डब्लूटीआई की टीम ने मौका मुआयना करने के बाद बाघ की निगरानी के लिए कैमरे भी लगा दिए। हालांकि चर्चा यह भी है कि किसान लालता प्रसाद की जान बाघ ने नहीं बल्कि बाघिन ने ली है।

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संविदा पर नौकरी देने की बात पर अड़े रहे परिजन

परिजनों व ग्रामीणों की मांग है कि तार फेंसिंग की जाए, बाघ को पकड़ा जाए। इसके अलावा मृतक के परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी दी जाए। अधिकारी मुआवजा देने, बाघ को पकड़ने और तार फेंसिंग कराने की मांग पर तो राजी थी लेकिन नौकरी की मांग पर टालमटोल करने लगे। बाद में सामाजिक वानिकी के डीएफओ संजीव कुमार ने इसका प्रस्ताव विभागीय अफसरों के समक्ष रखकर मांग को पूरा कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण शांत हुए।

घटनास्थल पर लगी ग्रामीणों की भीड़। संवाद

घटनास्थल पर लगी ग्रामीणों की भीड़। संवाद


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