Pilibhit News: चार ट्रैंकुलाइजर शॉट से काबू में आई दहशत का पर्याय बनी बाघिन

गन्ने के खेत की ओर भागती बेकाबू भीड़ । संवाद
कलीनगर। तीन माह से ग्रामीणों के बीच दहशत का पर्याय बनी बाघिन मंगलवार को डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद पकड़ ली गई। ट्रैंकुलाइजर के चार शॉट मारने के बाद वन विभाग के विशेषज्ञों की टीम उसे काबू कर पाई। बेहोश होने पर उसे ग्रामीणों की भीड़ के बीच पिंजरे तक लाने में भी वन कर्मियों को खासी सतर्कता बरतनी पड़ी। बाघिन को माला गेस्ट हाउस ले जाया गया है।
तीन महीने से माधोटांडा क्षेत्र के मथना जपती, रानीगंज, बासखेड़ा और जमुनिया इलाके में में बाघ और बाघिन की चहलकदमी देखी जा रही थी। डेढ़ महीने में उन्होंने हमलाकर तीन किसानों की जान भी ले ली। इससे ग्रामीण दहशत में थे। दस दिन पहले बासखेड़ा गांव में बाघिन को पकड़ने के लिए दो बार आपरेशन चलाया गया लेकिन सफलता नहीं मिली।
मंगलवार सुबह जमुनिया गांव निवासी रामपाल के गन्ने के खेत में बाघिन देखी गई। पुष्टि के बाद दोपहर करीब ढाई बजे सामाजिक वानिकी डीएफओ संजीव कुमार ने घेराबंदी कराई। साढ़े तीन बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। तीन शॉट मारने के बाद बाघिन बेहोश हुई। स्ट्रेचर पर लादकर पिंजरे की ओर ले जाते वक्त बाघिन गिर गई। होश में आने की आशंका पर उसे ट्रैंकुलाइजर का एक और शॉट मारा गया।
रेस्क्यू से पहले महिलाओं ने वाॅचर को पीटा, डीएफओ को घेरकर सुनाई खरी-खोटी
कलीनगर। माधोटांडा क्षेत्र में दहशत का पर्याय बनी बाघिन को पकड़ने से पहले विभाग को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। ऑपरेशन शुरू होने से पहले आक्रोशित महिलाओं ने वन विभाग के वाचर को पीट दिया। मौके पर पहुंचे डीएफओ संजीव कुमार को भी महिलाओं ने घेर लिया। विरोध के बीच अपराह्न करीब तीन बजे रेस्क्यू शुरू किया गया। जमुनिया गांव में बाघिन की मौजूदगी के चलते ग्रामीणों में काफी रोष देखा गया। बेकाबू भीड़ में महिलाएं भी शामिल रहीं। बाघिन को हर हाल में पकड़ने की मांग शुरू की गई। न पकड़ने पर भारी विरोध की चेतावनी भी दी गई। कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक को खरी-खोटी सुनाई गई। ग्रामीणों के रुख को देखकर ऐसा लग रहा था कि ऑपरेशन में सफलता न मिलने की ग्रामीण बाघिन पर हमला कर सकते हैं। ग्रामीण हाथों में लाठी डंडे, हंसिया आदि तक ले आए थे।
स्ट्रेचर से बाघिन के गिरते ही मची भगदड़
टीम बाघिन को स्ट्रेचर पर लादकर पिंजरे की ओर लाने के दौरान बेकाबू हुई भीड़ के चलते स्ट्रेचर अनियंत्रित होने से बाघिन नीचे गिर गई। इसी दौरान एकाएक बाघिन के होश में होने के चलते मौके पर भगदड़ मच गई। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को काबू कर बाघिन के चारों ओर जाल लगाया। इसके करीब 10 मिनट बाद टीम ने मशक्कत कर बाघिन को पिंजरे के अंदर डाला।
गन्ने के खेत में डेरा जमाए बाघिन की लोकेशन तलाश करने के लिए ड्रोन कैमरे की मदद ली गई। जैसे ही ऑपरेटर ने ड्रोन कैमरे को गन्ने की ओर उड़ाया। इस दौरान बाघिन गन्ने से निकलकर ऑपरेटर की ओर झपट पड़ी। हालांकि मौके पर जुटी भीड़ के शोर मचाने पर बाघिन फिर गन्ने के खेत में जाकर छिप गई। जिससे ऑपरेटर बाल-बाल बच गया।
विभाग बोला- पकड़ी गई हमलावर बाघिन, ग्रामीण बता रहे दूसरी
जमुनिया गांव में आपरेशन चलाकर पकड़ी गई बाघिन को लेकर अफसरों का कहना है कि तीन माह से आबादी क्षेत्र में इस बाघिन की मौजूदगी थी। ग्रामीणों पर हमला करने वाली भी यही बाघिन थी। हालांकि बासखेड़ा, रानीगंज क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इस इलाके में दूसरी बाघिन सक्रिय हैं। अहम बात यह है कि दोनों पक्षों के पास अपने दावों को पुष्ट करने के लिए कोई तथ्य नहीं हैं।
सामाजिक वानिकी और टाइगर रिजर्व की संयुक्त टीम को बाघिन पकड़ने में सफलता मिली है। तीन माह से इसी बाघिन की जंगल से बाहर चहलकदमी देखी जा रही थी।
– संजीव कुमार, डीएफओ सामाजिक वानिकी

गन्ने के खेत की ओर भागती बेकाबू भीड़ । संवाद

गन्ने के खेत की ओर भागती बेकाबू भीड़ । संवाद

गन्ने के खेत की ओर भागती बेकाबू भीड़ । संवाद

गन्ने के खेत की ओर भागती बेकाबू भीड़ । संवाद

गन्ने के खेत की ओर भागती बेकाबू भीड़ । संवाद

गन्ने के खेत की ओर भागती बेकाबू भीड़ । संवाद