Pilibhit News: सवा पांच साल से ट्रेनों का संचालन बंद… अब टूटने लगा लोगों का सब्र
पूरनपुर। आमान परिवर्तन के लिए ट्रेनों का संचालन बंद होने से लोगों को देश, प्रदेश की राजधानी तक पहुंचने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। इसका सीधा असर व्यापारी वर्ग पर पड़ा है। यहां से असम, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा जाने वाले चावल और बाहर से आने वाले सामान का किराया तीन गुना अधिक पड़ रहा है।
शाहगढ़ से मैलानी तक आमान परिवर्तन का काम पूरा होने पर लोगों को शाहगढ़ से लखनऊ तक ट्रेनोंं का संचालन जल्द शुरू होने की उम्मीद बंधी है, लेकिन जिला मुख्यालय के साथ ही बरेली, दिल्ली के लिए ट्रेन से सफर के लिए अभी इंतजार करना होगा। दरअसल, शाहगढ़ से पीलीभीत तक आमान परिवर्तन का काम अभी पूरा नहीं हो सका है। ट्रेनों का संचालन शुरू न हो पाने पर लोग अब आंदोलन का मन बना रहे हैं। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है।
यहां बता दें कि मैलानी से पीलीभीत और पीलीभीत से शाहजहांपुर तक आमान परिवर्तन के लिए ट्रेनों का संचालन एक जून 2018 से बंद कर दिया गया था। तब दो-ढाई साल में आमान परिवर्तन के बाद ट्रेनों का संचालन फिर से शुरू करने की बात कही गई थी। पीलीभीत से शाहजहांपुर तक तो आमान परिवर्तन के बाद ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया, लेकिन पीलीभीत से मैलानी तक सवा पांच साल बाद भी आमान परिवर्तन का काम पूरा न होने से ट्रेनें नहीं चल पाईं हैं।
शाहगढ़ से मैलानी तक आमान परिवर्तन का काम पूरा हो चुका है। इससे शाहगढ़ से मैलानी तक ट्रेनों के जल्दी चलने की उम्मीद लोग लगाए बैठे हैं, लेकिन जिला मुख्यालय समेत अन्य शहरों के लिए ट्रेनों का संचालन कब शुरू होगा, इसका कुछ पता नहीं है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। ट्रेनों का संचालन शुरू न होने से लोगों का सब्र अब टूटने लगा है।
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नगर का व्यापार 60 प्रतिशत कम हो गया है। ट्रेन से 50 रुपये में जिला मुख्यालय आना-जाना होता था। अब 200 रुपये खर्च हो रहे हैं। गुवाहटी, पंजाब आदि स्थानों से माल मंगवाने और भेजने पर तीन गुना अधिक भाड़ा लग रहा है। – हंसराज गुलाटी, प्रांतीय उपाध्यक्ष उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल
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कई व्यापारियों का व्यापार खत्म ही हो गया है। स्टेशन के समीप के व्यापारी बेरोजगार हो गए हैं। आवागमन में भारी असुविधा होती है। अब उग्र आंदोलन होगा। – हाजी मोहम्मद जाहिद खां, अध्यक्ष व्यापार मंडल
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ट्रेनों का संचालन बंद होने से राइस मिलर्स को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। चावल को दूसरे शहरों, प्रदेशों में भेजने पर तीन गुना ज्यादा भाड़ा लग रहा है। इससे आमदनी में कमी हुई है। आंदोलन में राइस मिलर्स बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। – अशोक खंडेलवाल
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आवागमन के साधन न होने से आसपास के गांवों के लोग खरीदारी के लिए अब पहले की तरह नगर में नहीं आते। नगर से बाहर आवागमन पर अब तीन गुना तक अधिक किराया देना पड़ रहा है। व्यापारी के साथ हर वर्ग के लोग ट्रेनें न चलने से परेशान हैं। – राजकुमार खंडेलवाल