रामपुर

Rampur News: राइस मिलों को चीनी उद्योग की तरह मिले आर्थिक पैकेज

Connect News 24

बिलासपुर (रामपुर)। राइस मिलों को उत्तराखंड की तर्ज पर बिजली दरों में छूट दी जाए। साथ ही राइस मिलों को चीनी उद्योग की तर्ज पर आर्थिक पैकेज भी दिया जाए और धान क्रय नीति 2023-24 में आवश्यक बदलाए किए जाएं। ये मांगें रविवार को राइस मिलर्स एसोसिएशन के सम्मेलन में मुख्य अतिथि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख के सामने राइस मिलों के मालिकों ने रखीं। मंत्री ने मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के साथ राइस मिल माालिकों के प्रतिनिधि मंडल को भी सीएम से मिलवाने का आश्वासन दिया। साथ ही भ्रष्ट अधिकारियों की सूची मुख्यमंत्री को देने की बात कही।

रविवार को बिलासपुर में हाईवे स्थित एक होटल में उत्तर प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में राइस मिल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने समस्याओं पर मंथन किया। राइस मिल मालिकों ने धान की खरीद क्रय केंद्रों के बजाय आढ़तियों द्वारा करने, विभिन्न क्रय एजेंसियों पर लंबित भुगतान, चावल उद्योग को प्रोत्साहन देने की समस्या उठाई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री ने कहा कि समस्याओं का समाधान कराने के लिए राइस मिलर्स एसोसिएशन के पांच सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल की वह लखनऊ में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कराएंगे। इसके बाद सीएम के साथ बैठक कराकर समस्याओं के समाधान पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि राइस मिल उद्योग का बेड़ा गर्क करने के भ्रष्ट आरोपी अधिकारियों की सूची भी उन्हें दें, ताकि वह सूची मुख्यमंत्री को सौंप सकें।

राज्यमंत्री ने कहा कि राइस मिल खत्म होंगी तो किसान भी खत्म हो जाएगा, लेकिन उनकी सरकार न तो राइस मिलों को खत्म होने देगी और न ही किसानों को। नई पालिसी बनाकर राइस मिल उद्योग को और बेहतर किया जाएगा। उत्तराखंड, हरियाणा व पंजाब की तर्ज पर उद्योगों को बढ़ावा देने का कार्य भी उनकी सरकार की प्राथमिकता है।

राइस मिलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन रमाकांत मोदी ने कहा कि सरकार सभी राइस मिलर्स का लंबित भुगतान शीघ्र करा दे और विद्युत दरों में छूट दे दे तो चावल उद्योग पहले से भी अधिक गति पकड़ लेगा। मंडल अध्यक्ष पुरुषोत्तम गोयल ने कहा कि सीएमआर का कार्य सभी के लिए अनिवार्य न करके ऐच्छिक किया जाए और राइस मिल उद्योग को उत्तराखंड हरियाणा व पंजाब की तर्ज पर सुविधाएं उपलब्ध कराईं जाएं, ताकि चावल उद्योग घाटे से उबर सके।

जिलाध्यक्ष मुन्ने अली नवाब ने कहा कि चीनी मिल उद्योग की तर्ज पर राइस मिल उद्योग को भी एक विशेष आर्थिक पैकेज जैसे लंबी अवधि का ब्याज मुक्त ऋण दिया जाए, ताकि चावल उद्योग पुनर्जीवित हो सके। उन्होंने कहा कि सुविधाओं के अभाव में पूरे प्रदेश में राइस मिलों की संख्या 3000 से घटकर करीब 1000 रह गई है। जिससे लोगों के सामने रोजगार का संकट भी पैदा होने लगा है। सभी ने मुख्यमंत्री को संबोधित 12 सूत्रीय ज्ञापन राज्यमंत्री को सौंपा। कार्यक्रम का संचालन संरक्षक पीडी अग्रवाल ने किया।

सम्मेलन में ये रहे शामिल

सम्मलेन में उत्तर प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री विनय शुक्ला, प्रदेश कोषाध्यक्ष प्रमोद सिंह, शाहजहांपुर जिलाध्यक्ष हरि किशोर गुड्डू, महामंत्री विवेक कुमार अग्रवाल, उत्तर प्रदेश आईआईए एग्रो इंडस्ट्रीज के चेयरमैन सुधीर अग्रवाल, डायरेक्टर बीएन शुक्ला, पीलीभीत जिलाध्यक्ष व प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजमेर सिंह छीना, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष गोविंद कांत द्विवेदी, अमरोहा जिलाध्यक्ष विनय माहेश्वरी, मंडल अध्यक्ष पुरुषोत्तम गोयल, मंडल उपाध्यक्ष आबिद अली, मंडल महामंत्री सचिन शर्मा, अरुण बंसल, नदीम गफ्फार, मनोज कंसल, हाजी पुत्तन अली, परवेज अली, वकील अहमद, डिबडिबा अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल, चंदन अग्रवाल, महामंत्री जितेंद्र अग्रवाल, घनश्याम सिंघल, पुरुषोत्तम अग्रवाल, श्याम घई, अरुण अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

सीएम को भेजे ज्ञापन में ये बताईं समस्याएं

-धान क्रय नीति 2023-24 में आवश्यक बदलाव करते हुए धान खरीद का कार्य आढ़तियों के माध्यम से कमीशन पर अन्य प्रदेशों की भांति किया जाए।

-फोर्टीफाइड चावल शासन द्वारा ही मिलर्स को उपलब्ध कराया जाए और मिलर्स को समय से सभी भुगतान दिलाए जाए।

-मिलर्स से गारंटी क्रय एजेंसीवार ली जाए न कि क्रय केंद्रवार।

-एडवांस दी गई लाट का प्रोत्साहन दिलाया जाए

-सेला बनाने वाली मिलों को सीएमआर के कार्य से मुक्त रखा जाए।

-छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश की तर्ज पर धान कुटाई की दर सौ रुपये प्रति क्विंटल करने व प्रोत्साहन राशि भी सौ रुपये प्रति क्विंटल की जाए।

-मंडल में धान खरीद का लक्ष्य दुगना करने तथा किसानों को अपनी फसल किसी भी क्रय केंद्र पर तुलवाने की सुविधा दिलाई जाए।

-धान की खरीद वास्तविक उत्पादन को आधार मानकर की जाए।

-राइस मिल उद्योग को विद्युत दरों में उत्तराखंड की भांति विशेष छूट दी जाए।

-राइस मिल उद्योग को चीनी मिल उद्योग की तर्ज पर विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाए।


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