Shahjahanpur: 24 साल बाद सामूहिक दुष्कर्म में तीन दोषियों को आजीवन कारावास, एक की हुई मौत, बाकी आरोपी बरी

सांकेतिक तस्वीर
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शाहजहांपुर में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अखिलेश कुमार पाठक ने दुष्कर्म के मुकदमे में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसी मामले में तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। एक आरोपी की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, जलालाबाद क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने 22 मार्च 1999 को रिपोर्ट लिखाई थी। इसमें बताया कि 21 मार्च की रात वह और उसकी बेटी घर के बरामदे में सो रहे थे। कमरे में उसका बेटा और बहू सो रहे थे। रात करीब साढ़े 12 बजे अचानक आठ-दस बदमाश असलहे लेकर घुस आए और उसके गले में पड़ा मंगलसूत्र तोड़ने लगे। उनमें से चार लोग उसकी बेटी और बहू को उठाकर गेहूं के खेत में ले गए। शोर मचाने पर बदमाशों ने महिला, उसके बेटे और एक पड़ोसी के हाथ-पैर बांध दिए। आतंक फैलाने के लिए हवाई फायर किए। इससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
सूचना पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने उन लोगों को बंधन मुक्त किया। वे लोग पुलिस के साथ गेहूं के खेत में पहुंच गए। वहां पर उसकी बेटी और बहू अस्त- व्यस्त हालत में मिले। उन्होंने बताया कि चारों बदमाशों ने उनके साथ दुष्कर्म किया है। उन लोगों ने बदमाशों को ललकारा और दो बदमाशों को पकड़ लिया। महेंद्र और बाबा ने उसकी बेटी व नीलू तथा देवनारायण ने बहू के साथ दुष्कर्म किया था। पुलिस ने जलालाबाद क्षेत्र के गांव मझरा निवासी महेंद्र, नीलू, संत्तू उर्फ संतराम, धनपाल, बाबा, मिर्जापुर थाना क्षेत्र के गांव चितरन निवासी कल्लू, गांव महुआडांडी निवासी देवनारायण के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की।
अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान और सरकारी वकील मनोज कुमार मिश्र और अतुल कुमार अग्निहोत्री के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने बाबा, नीलू और महेंद्र को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सत्तू उर्फ संतराम, धनपाल, कल्लू को बरी कर दिया गया। देवनारायण की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई।