Shahjahanpur News: छुट्टी पर डॉक्टर, विशेषज्ञ न होने से भटक रहे मरीज
शाहजहांपुर। भीषण गर्मी में डायरिया, बुखार समेत कई रोगों के मरीज बढ़ने से राजकीय मेडिकल कॉलेज में मारा-मारी मची हुई है। इसके विपरीत पीएचसी-सीएचसी पर मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के 14 डॉक्टर ज्वाइन करने के बाद लौटकर नहीं आए, जबकि एक ने अपना त्यागपत्र दे दिया।
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को गांव के नजदीक ही स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए जिले में 39 पीएचसी व 15 सीएचसी स्थापित हैं। इन स्वास्थ्य इकाइयों पर स्टाफ की काफी कमी है। पीएचसी-सीएचसी पर 186 डॉक्टरों की आवश्यकता है, लेकिन इसके सापेक्ष 80 डॉक्टर ही तैनात हैं। जिले की स्वास्थ्य इकाई पर कार्यरत 15 डॉक्टर ज्वाइन करने के बाद छुट्टी पर गए तो लौटकर नहीं आए।
इनमें एक ने अपना त्यागपत्र भिजवा दिया है। ऐसे में ग्रामीण स्वास्थ्य इकाइयों में विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ नहीं होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। लाखों रुपये का अस्पताल बनने के बाद भी डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। अधिकतर पीएचसी-सीएचसी से मरीजों के रेफर किए जाने से राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा रही हैं।
छुट्टी से लौटकर नहीं आए, एक ने भेजा त्यागपत्र
स्वास्थ्य इकाई बंडा के पवन कुमार सिंह व डॉ. कृष्णमोहन गुप्ता, जलालाबाद के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. रणविजय सिंह, डॉ. शशांक अग्रवाल, मोहम्मद इमरान, अल्हागंज से डॉ. रामआसरे, निगोही से डॉ. रजा फैजान, कटरा-खुदागंज से डॉ.पिंकी निशा, बंडा के देवकली के डॉ. नरेंद्र कुमार, निगोही के लोहरगवां के डॉ.कन्हैयालाल, भावलखेड़ा के बरतारा के डॉ. आनंद कृष्ण दीक्षित, सेहरामऊ के डॉ. गजेंद्र पाल सिंह, खुटार के कहमरिया के डॉ. राखी सिंह व नवदिया के डॉ. मोहित छुट्टी लेकर गए और लौटकर नहीं आए। इनमें बाल रोग, हड्डीरोग, फिजिशियन आदि शामिल थे। जबकि कलान के डॉ. प्रभात ने अपना इस्तीफा भेज दिया है।
तीन साल पहले डॉक्टर छुट्टी लेकर गए। उनके नहीं आने पर नोटिस भेजने के साथ शासन से पत्राचार किया गया। शासन स्तर से ही डॉक्टरों पर फैसला लिया जाएगा। -डॉ. आरके गौतम, सीएमओ