Shahjahanpur News: सफाई में औंधे मुंह गिरा स्मार्ट सिटी, कूड़ा निस्तारण में मिला शून्य

शहर के चारखंभा पर सीवर लाइन के खोदी गई सड़क में फंसा नगर निगम का टैंकर व किनारे से निकलने का प्
शाहजहांपुर। शाहजहांपुर को इंदौर बनाने का सपना देख रहा नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण-2023 में औंधे मुंह गिरा है। राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता की रैंकिंग में शाहजहांपुर 109 अंक नीचे गिरकर 181वें स्थान पर पहुंच गया। इससे पहले वर्ष 2022 में 72वीं रैंकिंग पाकर शाहजहांपुर टॉप 100 शहरों में शामिल हुआ था। अधिकारी सीवर लाइन डालने के लिए हो रही खोदाई को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, लेकिन हकीकत में पूरे साल कूड़ा निस्तारण न होने से शहरवासी परेशान रहे।
वर्ष 2018 में नगर निगम बनने के बाद शाहजहांपुर को स्वच्छता के मामले में बड़ी उम्मीद थी। मोहल्ला समितियों का गठन किया गया, डोर-टू-डोर कलेक्शन की शुरुआत की गई। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग देने के लिए लोगों को जागरूक किया गया। कूड़ा प्रबंधन के लिए कंपोस्टर रखवाए गए। शुरुआती दौर में इसका असर भी देखा गया। वर्ष 2018 की रैंकिंग में 308वां स्थान था। वर्ष 2020 में यह बढ़कर 107 और वर्ष 2022 में 72वें स्थान पर पहुंच गया। इस बार 181वीं रैकिंग के साथ फिसड्डी शहरों की सूची में शामिल हो गया।
डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में 67 फीसदी अंक
डोर-टू-डोर कूड़ा उठान में नगर निगम को 67 प्रतिशत अंक मिले हैं। जबकि स्रोत पृथक्करण में 54 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। कूड़ा निस्तारण में जीरो प्रतिशत अंक ही हासिल हुए हैं। हालांकि कूड़ेदानों से कूड़ा निस्तारण में 100 प्रतिशत, आवासीय क्षेत्र में सफाई को लेकर 56 प्रतिशत, बाजार में सफाई को लेकर 55 प्रतिशत, निकायों की सफाई को लेकर 100 प्रतिशत और सार्वजनिक शौचालय की सफाई के मामले में 89 प्रतिशत अंक मिले हैं। सर्वेक्षण-2023 में घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था धड़ाम हो गई। ट्रिपल एम इंडिया कंपनी के कूड़ा कलेक्शन और प्रत्येक घर से सुविधा शुल्क लेने में फेल साबित होने पर नगर निगम ने अनुबंध तोड़ लिया था। घर-घर से कूड़ा उठान के लिए हर घर से 50 रुपये सुविधा शुल्क निर्धारित है, लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि उनसे 100 रुपये लिए जा रहे हैं।
बिजली बनाने का प्रोजेक्ट फेल, खाद के खरीदार नहीं
शहर में रोजाना 130 टन से अधिक कूड़ा निकलता है। इसके निस्तारण के लिए साल 2018 में ककरा स्थित डंपिंग ग्राउंड के पास कूड़े से बिजली बनाने की योजना बनाई थी। नगर निगम ने एजी डॉटर्स नाम की कंपनी से समझौता किया था। दो साल तक कंपनी काम ही शुरू नहीं कर पाई। सिर्फ कूड़े से खाद बनाने की मशीन लाकर डंपिंग ग्राउंड पर खड़ी कर दी गई। बिजली उत्पादन शुरू न होने से 2020 में कंपनी से समझौता तोड़ लिया। इसके बाद डंपिंग ग्राउंड पर कूड़े के निस्तारण को एमआरएफ सेंटर का निर्माण करवाया है, जहां कूड़े से खाद बनाई जा रही है। अधिकारियों की मानें तो अब तक 20 हजार टन से अधिक खाद बनाई जा चुकी है। वहीं खिलौली में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाया जा रहा है, जिसका काम अब तक पूरा नहीं हो सका है।
सीवर लाइन के लिए खोदी सड़कें मुख्य वजह
अधिकारियों की मानें तो स्वच्छता रैंकिंग में फिसड्डी साबित होने की मुख्य वजह सीवर लाइन बिछाने के लिए शहर की सड़कों का खोदा जाना रहा। बारिश के दौरान सड़कों पर कीचड़ हो गया। हालांकि अगले वर्ष स्वच्छता रैकिंग में सुधार होने की संभावना जताई जा रही है।
पिछले वर्ष की अपेक्षा स्वच्छता रैकिंग में गिरावट आई है। इसके जो भी कारण रहे, उनमें सुधार किया जाएगा। अगले वर्ष की स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा। – संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त, नगर निगम शाहजहांपुर

शहर के चारखंभा पर सीवर लाइन के खोदी गई सड़क में फंसा नगर निगम का टैंकर व किनारे से निकलने का प्

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