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Shahjahanpur News: बाढ़ लील गई हजारों एकड़ फसल, मुआवजा मिला मुट्ठीभर

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शाहजहांपुर/ मिर्जापुर। दो महीने पहले आई बाढ़ ने जलालाबाद और कलान तहसील क्षेत्र में हजारों एकड़ फसल तबाह कर दी। किसानों को उम्मीद थी कि सरकार मुआवजा के जरिये उनके जख्मों पर मरहम लगाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार से जो मुआवजा मिला उससे वे अगली फसल के लिए बीज भी नहीं खरीद सकते।

बाढ़ क्षेत्र में हजारों एकड़ जमीन बाढ़ जलमग्न हो गई थी। सबसे अधिक धान, उर्द, तिल आदि की फसलों का नुकसान हुआ था। फसल मुआवजा के नाम पर किसानों के साथ खिलवाड़ किया गया। पूरे जिले में कुल 1534 किसानों को फसल नुकसान के लिए चिह्नित किया गया। कुल 1534 किसानों को 44 लाख 57 हजार का मुआवजा दिया गया है। एक किसान को औसतन करीब 29 सौ रुपये ही मिल रहे हैं। इतना कम मुआवाजे से किसान रबी फसल के लिए बीज और एक खाद का कट्टा भी नहीं खरीद सकता है।

इन गांवों में फसल हो गईं नष्ट

गंगा के खादर क्षेत्र में बसे डेढ़ दर्जन ग्राम पैलानी उत्तर, मस्जिद नगला, कटैला नगला, बटन नगला, अभिचारपुर, लोहार नगला, मोती नगला, बांसखेड़ा, इस्लामनगर, आजाद नगर, भरतपुर, पंखिया नगला, पकड़िया नगला, धोबियन नगला, गुटेटी उत्तर, धीयरपुरा, मोहकमपुर, महोलिया आदि गांवों की शत प्रतिशत खरीफ फसलें दो माह चली गंगा की बाढ़ में डूबकर नष्ट हो गई थीं। इससे लगभग 25 हजार आबादी पूरी तरह प्रभावित रही थी।

ग्रामीण हैरान

पैलानी उत्तर के प्रधान के पति फारुक अली ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत के 10 मजरों के हजारों किसानों की फसल नष्ट हो गईं, लेकिन 50 किसानों को ही फसल के नुकसान का मुआवजा दिया गया है।

गुटेटी उत्तर के प्रधान अलवर सिंह ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत के चार मजरे गुटेटी उत्तर, धीयरपुरा, मोहकमपुर और महोलिया के सिर्फ 100 किसानों को ही फसल नुकसान का मुआवजा मिल सका।

भरतपुर के प्रधान के प्रतिनिधि संतोष सिंह ने बताया कि चकबंदी के कारण ग्राम पंचायत की खतौनी तहसील से गायब है। न तो फसल नुकसान का सर्वे किया गया और न ही किसी को मुआवजा मिला।

पैलानी उत्तर के लेखपाल अंकेश कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत के अधिकांश मजरों में गन्ने की खेती होती है। बाढ़ में गन्ने की फसल को नुकसान नहीं होता है। अधिकांश जमीन एक फसली है। इसी के आधार पर 50 लोगों का ही फसल नुकसान माना गया है।

किसानों की बात

12 बीघा कृषि भूमि में धान, उर्द, तिल और गन्ने की फसल थी। बाढ़ में डूबकर पूरी तरह नष्ट हो गई। सरकार से फसल नुकसान के 3200 रुपये मिले हैं। इनमें खेतों की जुताई तो दूर एक कट्टा डीएपी और बीज भी नहीं मिल रहा है।- रामरहीस, ग्राम महोलिया

15 बीघा खेत मे मक्का, धान और गन्ने की फसल बोई थी। दो माह तक फसलें बाढ़ में डूबी रहीं। सरकार से फसल नुकसान के नाम पर सिर्फ 3500 रुपये मिले हैं। इतने में तो 15 बीघा खेत मे रबी फसलों की बुवाई भी नहीं हो पा रही है।- शीशपाल, ग्राम पंचायत गुटेटी उत्तर

13 बीघा खेत मे मक्का, उर्द, तिल और धान की फसलें थीं। बाढ़ में डूबकर नष्ट हो गईं। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी एक फूटी कौड़ी मुआवजा नहीं मिला है। राजस्व विभाग ने किस मानक से सर्वे किया, कोई बताने को तैयार नहीं है।- ब्रजेंद्र सिंह, ग्राम महोलिया

17 बीघा खेत मे मक्का, उर्द, तिल, धान की फसल थी। बाढ़ में डूबकर नष्ट हो गई। लेखपाल ने पता नहीं कैसे फसल नुकसान का सर्वे किया। उसे कोई सहायता नहीं मिली। कोई अधिकारी शिकायत भी सुनने को तैयार नहीं है।- राममहेश, मजरा गुटेटी

दो माह तक गंगा में रही बाढ़ से ग्राम पंचायत पैलानी उत्तर के सभी 10 मजरा डूबे रहे। सभी फसलों के साथ कई ग्रामीणों के कच्चे-पक्के मकान भी ढह गए। फिर भी पूरी ग्राम पंचायत के सिर्फ 50 लोगों को ही मुआवजा दिया गया है।- इकरार, ग्राम इस्लामनगर

80 बीघा जोत में धान, मक्का, उर्द, तिल, ज्वार और गन्ने की फसलें नष्ट हो गईं। गांव के किसी किसान को फसल नुकसान का एक पैसा नहीं मिला है। धनाभाव में रबी की फसल बुवाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। – आदेश कुमार, ग्राम मोती नगला

फसल नुकसान का आकलन राजस्व विभाग की टीम ने किया। जिसका जितना नुकसान हुआ, उसके आधार से शासन की तरफ से मिलने वाला मुआवजा किसान को दिया गया है। – डॉ. सुरेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व


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