Shahjahanpur News: ट्रेनें चल रहीं फुल, स्लीपर की हालत जनरल जैसी
शाहजहांपुर। गर्मी की छुट्टियों के बीच ट्रेनों में खासी भीड़ उमड़ रही है। यात्री वेटिंग का टिकट लेकर स्लीपर कोच में घुस रहे हैं, इससे कंफर्म टिकट वालों को सीट नहीं मिल पा रही है। वेटिंग और एमएसटी धारकों ने स्लीपर कोच की हालत जनरल से भी बदतर कर दी है। वहीं स्टेशन पर पेयजल की व्यवस्था न होने के कारण यात्रियों को महंगा पानी खरीदना पड़ रहा है।
दोपहर में आई त्रिवेणी एक्सप्रेस में इतनी भीड़ थी कि चढ़ने और उतरने को लेकर यात्री धक्कामुक्की करते दिखे। ट्रेन के जनरल कोच में इतनी जगह भी नहीं थी कि कोई पैर रख सके। स्लीपर क्लास के कोच में भी यात्री ठुंसे हुए थे। दोपहर एक बजे के करीब आई राज्यरानी एक्सप्रेस में यही हाल था, जबकि शाम सात बजे जंक्शन पर पहुंची मेरठ-लखनऊ एक्सप्रेस के जनरल कोच में यात्री एक-दूसरे के ऊपर तक लदे दिखे। कोच के अंदर सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। कुछ यात्री शौचालय के पास बैठकर सफर करने के लिए मजबूर दिखे। 70 से 75 यात्रियों की क्षमता रखने वाली बोगियों में दो से ढाई सौ से तक यात्री यात्रा कर रहे हैं। ऐसी ही स्थिति श्रमजीवी एक्सप्रेस, बरेली-वाराणसी एक्सप्रेस, किसान एक्सप्रेस में भी देखने का मिली।
वहीं यात्रियों को भीषण गर्मी और भीड़ के कारण सांस लेना मुश्किल हो रहा है। पेशाब जाने के लिए भी जगह ही नहीं मिल रही है। शौचालय पर भी यात्रियों का कब्जा है। यात्री पानी के लिए स्टेशन पर नहीं उतर पा रहे हैं। गर्म हवा के कारण यात्रियों की तबीयत खराब हो रही है। किसी तरह से प्लेटफार्म पर उतर गए तो, वहां भी ठंडा पानी नहीं मिल पा रहा। जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक पर आरपीएफ के सामने स्थित बूथ पर ठंडा पानी हीं नहीं आ रहा था।
स्लीपर में वेटिंग टिकट वालों का कब्जा
गर्मी की छुट्टियां लगते ही लोगों का गाड़ियों में आवागमन बढ़ गया है। शादी में शामिल होने या पर्यटन की दृष्टि से लोग यात्रा कर रहे हैं। छोटे बच्चे और बुजुर्गों के हाल बुरे हो रहे हैं। स्लीपर बोगियों में वेटिंग टिकट वालों की इतनी भीड़ है कि कंफर्म टिकट वालों को बोगी में चढ़ना मुश्किल हो रहा है। किसी तरह बोगी के अंदर प्रवेश कर भी गए तो सीट पर कोई और कब्जा किए रहता है। सीट खाली करवाने में भी विवाद हो रहे हैं। ऐसे में स्लीपर बोगी भी जनरल बोगी बनकर रह गई है।
रोजा रेलवे स्टेशन पर भी पानी के लिए तरस रहे लोग
रोजा रेलवे स्टेशन पर लगी पानी की टंकी लंबे समय से टूटी पड़ी है। पानी न बहे इसलिए उसमें लकड़ी ठोक दी गई है। वहीं दूसरी ओर अवैध वेंडर 15 की जगह 20 रुपये की पानी की बोतल बेच रहे हैं। मजबूरी में रेल यात्रियों को महंगा पानी खरीदना पड़ रहा है।