कारतूस कांड : पुलवामा के डीआईजी की गवाही नहीं हो सकी पूरी
रामपुर। सूबे के चर्चित कारतूस कांड में सोमवार को पुलवामा के डीआईजी जेके मिश्रा ने अपने बयान दर्ज कराए। हालांकि, उनकी गवाही पूरी नहीं हो सकी।कोर्ट ने दस्तावेजों को तलब करते हुए सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख निर्धारित की है। घटना के समय जेके मिश्रा रामपुर सीआरपीएफ कैंप में डीआईजी के पद पर तैनात थे।10 अप्रैल 2010 को सिविल लाइन थाना क्षेत्र के ज्वालानगर रेलवे क्रासिंग के पास से एसटीएफ की टीम ने सीअरपीएफ के दो हवलदार विनोद और विनेश पासवान को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ ने उनके कब्जे से भारी मात्रा में कारतूस इंसास, नकदी बरामद की थी। इसके बाद दोनों की निशानदेही पर इलाहाबाद पीएसी से रिटायर्ड एक दरोगा यशोदा नंदन, मुरादाबाद पीटीसी के आर्मरर नाती राम सैनी समेत बस्ती गोंडा, बनारस सहित कई जिलों से पुलिस व पीएसी के आर्मरर को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। ट्रायल के दौरान दरोगा यशोदानंदन की मृत्यु हो चुकी है और सभी आरोपी जमानत पर चल रहे हैं।
इस मुकदमे में अभियोजन की गवाही पूरी हो चुकी है। सोमवार को इस मुकदमे की सुनवाई स्पेशल जज ईसी एक्ट विजय कुमार की कोर्ट में हुई। सुनवाई के दोरान पुलवामा में तैनात और घटना के समय रामपुर सीआरपीएफ में रहे डीआईजी जेके मिश्रा ने अपने बयान दर्ज कराए, लेकिन उनकी गवाही पूरी नहीं हो सकी। कोर्ट ने दस्तावेजों को तलब करते हुए सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की है।