मौसम बढ़ा रहा मच्छर: बरेली में सर्दी तक चुभता रहेगा डंक, बीमारियां बढ़ने की आशंका; बरतें सावधानी

विश्व मच्छर दिवस
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पांच साल बाद फिर से बरेली का मौसम मच्छरों के पनपने के अनुकूल बना है। इस वजह से यहां मच्छरजनित बीमारियों के बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कड़ाके की ठंड से पहले मच्छरों का खात्मा नहीं होगा। मच्छरों से बचाव और साफ-सफाई ही बीमारी से बचने का तरीका है। बचाव के उपाय न हुए तो मलेरिया और डेंगू के मरीज बढ़ेंगे। हालांकि, नतीजा सभी के सामने है। अगस्त के 18 दिनों में मलेरिया के 564 मरीज सामने आ चुके हैं।
बरेली कॉलेज में जंतु विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. कमल सक्सेना के मुताबिक कड़ाके की ठंड शुरू होने तक मच्छरों का प्रकोप जारी रहेगा। दरअसल मई, जून, जुलाई में हुई तेज बारिश के बाद अगस्त में भी बादलों का जमावड़ा होने से जगह-जगह छिटपुट बारिश जारी है। लिहाजा, लंबे समय तक मच्छरों के लार्वा को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिलता रहेगा। यही वजह रही कि इस साल अप्रैल में मलेरिया के 12 मरीज रहे जबकि मई में तादाद 36, जून में 183 और जुलाई में 270 तक जा पहुंची। अब 1100 के पास है। बारिश की वजह से मौसम में नमी भरपूर है। जगह-जगह जलभराव है।
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डॉ. सक्सेना के मुताबिक तापमान भी मच्छरों की वंशवृद्धि की वजह बनता है। अधिकतम तापमान 25 डिग्री से कम और 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होने पर लार्वा पनपने की क्षमता प्रभावित होती है। 20 डिग्री से कम और 40 डिग्री से ज्यादा पहुंचने पर मच्छरों का प्रकोप थमता है। 28 से 35 डिग्री के बीच तापमान में मच्छर अधिक पनपते हैं। वर्तमान में यही तापमान दर्ज हो रहा है। यह मच्छरों के पनपने का अनुकूल माहौल है।



