जरी कारोबार: बरेली में चार लाख लोगों के रोजगार का जरिया है जरी, यहां बने सूट-साड़ियों की डिमांड विदेश तक

जरी जरदोजी का काम करते कारीगर
– फोटो : अमर उजाला
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काली पन्नी और गल चुकी पुरानी चादरों से तनी छोटी सी कोठरी देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगता कि यहां सुई-धागों से देश-विदेश तक चमक बिखेरने वाली जरी कारीगरी हो रही है। बरेली जिले में जरी कारोबार करीब चार लाख लोगों की गुजर-बसर का जरिया बना हुआ है।
जरी कारोबारी शाकिर के मुताबिक, बरेली में जरी के बने सूट, साड़ियों की मांग दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद और पंजाब में सर्वाधिक हैं। यहां सूट पर कढ़ाई का काम महिलाओं को लुभाता है। ऐसे उत्पाद विदेश में खाड़ी देश के दुबई, तुर्किये, अरब के अलावा लंदन, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में निर्यात होते हैं।
करीब 300 करोड़ का सालाना कारोबार देश और विदेश तक फैला है। करीब पांच हजार ठेकेदारों के निर्देशन में यह कारोबार बरेली में हो रहा है। इसमें करीब चार लाख से ज्यादा आबादी कार्य कर रही है। बताया कि बरेली का पुराना शहर, बाकरगंज, बहेड़ी, फरीदपुर, नवाबगंज, फतेहगंज पश्चिमी में जरी कारोबार जोरों पर होता है।



