Bareilly News: जिला अस्पताल का दम फूला, तीन सौ बेड़ अस्पताल देगा ऑक्सीजन
बरेली। तीन सौ बेड अस्पताल का संचालन शहर के लिए कितना जरूरी है, यह न तो जिले के अफसर समझ रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि। यही वजह है कि शासन स्तर पर इसके संचालन की पैरवी लचर है। जिस अस्पताल की नींव 10 साल पहले रखी गई, जाहिर है उसकी जरूरत उससे कई साल पहले तब के अफसरों और नेताओं ने समझी होगी। अमर उजाला ने पड़ताल की कि आखिर तीन सौ बेड अस्पताल का संचालन तत्काल शुरू होना क्यों जरूरी है। दरअसल, मरीजों की बढ़ती संख्या से जिला अस्पताल का दम फूल गया है। इसे तीन सौ बेड अस्पताल से ही ऑक्सीजन मिलेगी। आप भी समझिए…
करीब सौ साल पहले ब्रिटिश शासनकाल में बने भवन में महाराणा प्रताप संयुक्त चिकित्सालय यानी जिला अस्पताल का संचालन हो रहा है। इसका निर्माण उस दौर की जरूरतों के हिसाब से किया गया था। इसके सुंदरीकरण और सुदृढ़ीकरण के लिए भी कोई खास पहल नहीं हुई। अब इस अस्पताल में मरीजों की तादाद कई गुना बढ़ चुकी है। जगह कम होने से पर्चा और दवा काउंटर पर मरीजों की भीड़ रहती है। कई बार तो धक्का-मुक्की तक की नौबत आ जाती है।
अस्पताल में गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) नहीं है। पुरानी सीटी स्कैन मशीन खराब हो चुकी है। हाईफ्लो नेजल कैनुला, ऑक्सीजन कन्संट्रेटर, ऑक्सीजन प्लांट स्थापित नहीं हैं। बच्चा वार्ड में बीमार बच्चों को भर्ती करने के लिए अक्सर बेड कम पड़ जाते हैं। पुराने परिसर के वार्डों में मरीज भर्ती करने के लिए आवागमन में भी कठिनाई होती है।
पैथोलॉजी में जांचें रोजाना सात हजार तक जा पहुंची हैं। उपकरण स्थापना और सेवा विस्तार के लिए भूमि कम पड़ रही है। सीवर लाइन पुरानी होने से जलभराव और अन्य समस्याएं जब तब सामने आती रहती हैं। बाजार के बीच होने से अतिक्रमण से संकरी सड़कों से गुजरकर अस्पताल तक पहुंचने के लिए मरीज जूझते हैं। एंबुलेंस की आवाजाही भी प्रभावित होती है।
…और तीन सौ बेड अस्पताल में इतनी सुविधाएं
इधर, तीन सौ बेड अस्पताल में 35 बेड के आईसीयू में 33 वेंटिलेटर बेड, 13 एचएफएनसी, ऑक्सीजन प्लांट, जेनरेटर, पानी की टंकी, किड्स वार्ड, डिलीवरी ओटी आदि हैं। अस्पताल पहुंचने के लिए चौड़ी सड़क और बड़ा परिसर इसकी विशेषता है। भविष्य में होने वाले सेवा विस्तार में भी अड़चन नहीं आनी है।
तीन सौ बेड अस्पताल में लगेगी सीटी स्कैन मशीन
एडीएसआईसी डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल परिसर में सीटी स्कैन की नई मशीन लगाने का प्रस्ताव था। तैयारियां भी लगभग पूरी हो गई थीं मगर भूमि की उपलब्धता, आवागमन आदि बिंदुओं पर फर्म ने आपत्ति जता दी। लिहाजा, अब तीन सौ बेड अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन स्थापित की जाएगी। ऑक्सीजन प्लांट स्थापना को लेकर भी मशीन के आवागमन में अड़चन की आशंका फर्म ने जताई है। इस वजह से इसकी भी स्थापना यहां संभव नहीं है।
आधे घंटे में तय हो रहा दस मिनट का रास्ता
निर्माण कार्य की वजह से जिला अस्पताल तक पहुंचने की सड़क जर्जर हो चुकी है। इंद्रा मार्केट या जिला पंचायत रोड से आने में भी अतिक्रमण से संकरी हुईं सड़कें मुसीबत बनती हैं। एंबुलेंस अक्सर अतिक्रमण में फंस जाती हैं। दो एंबुलेंस के आवागमन पर बिहारीपुर से अस्पताल तक पहुंचने के लिए दस मिनट का सफर आधे घंटे में तय होता है।
ब्लड बैंक में नहीं लग सका ऑटो इम्युनोलाइजर
जिला अस्पताल परिसर के ब्लड बैंक में फुली क्रॉस मैचिंग मशीन (ऑटो इम्युनोलाइजर) स्थापित किया जाना है। मगर पांच माह पहले ब्लड बैंक पहुंची मशीन अब तक स्थापित नहीं हो सकी है। एडीएसआईसी के मुताबिक फर्म के प्रतिनिधि अब तक मशीन इंस्टॉल करने नहीं पहुंचे हैं। ब्लड बैंक में मशीन स्थापित होने के बाद जगह कम होने की आशंका भी जताई जा रही है।
जिला अस्पताल एक नजर में
– प्रतिदिन 1300 मरीजों की ओपीडी, 90 इमरजेंसी
– प्रतिदिन 250 सैंपलिंग, सात हजार अन्य सैंपल की जांच
– कुल 325 बेड, 86 ऑक्सीजन बेड, 25 एनएचएम के अधीन
– चार बेड की ओटी, मेल, फीमेल, पेइंग और बच्चा वार्ड
– पोषण पुनर्वास केंद्र में दस ऑक्सीजन बेड, मैनीफोल्ड



