Bareilly News: संसाधन और मरीज बढ़े पर डॉक्टरों की कमी पड़ रही भारी
बरेली। बीते एक दशक में स्वास्थ्य विभाग में तेजी से संसाधन बढ़े पर उसी अनुपात में मरीज भी बढ़े। 86 करोड़ की लागत से निर्मित तीन सौ बेड अस्पताल में आधी अधूरी तैयारियों के साथ ओपीडी शुरू हुई पर विशेषज्ञों के अभाव में करोड़ों के उपकरण धूल फांक रहे हैं। शासन-प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग बेहतर इलाज के लिए कर्जदार होने को विवश है।
जिला संयुक्त चिकित्सालय, जिला महिला चिकित्सालय के अतिरिक्त बरेली में सीएचसी, यूपीएचसी, पीएचसी समेत 71 स्वास्थ्य केंद्र हैं। एक दशक पहले जिला अस्पताल की ओपीडी 800-1,000 पर सिमटती थी। अब यह तीन हजार तक जा पहुंची है। जिला अस्पताल में निशुल्क डायलिसस यूनिट पीपीपी मोड पर संचालित है।
अस्पताल में दो वेंटिलेटर हैं पर प्रशिक्षित चिकित्सक न होने से धूल फांक रहे हैं। सभी सीएचसी पर स्वीकृत पदों के सापेक्ष 50 फीसदी भी चिकित्सक तैनात नहीं हैं। जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 230 पद स्वीकृत हैं, लेकिन तैनाती महज 148 की है। स्वास्थ्य विभाग शासन को पत्र भेजकर चिकित्सकों की मांग कर रहा है। हाल ही में जारी तबादला सूची में बरेली से तीन डॉक्टर स्थानांतरित हुए पर उनके स्थान पर नई तैनाती नहीं की।
एक-दो चिकित्सक कर रहे हैं इलाज
शासनादेश के अनुसार जिले में प्रत्येक पीएचसी, सीएचसी पर एक विशेषज्ञ चिकित्सक, एक फिजिशियन, एक सर्जन, एक एनेस्थेटिस्ट, एक रेडियोलॉजिस्ट और एक गायनेकोलॉजिस्ट तैनात होना चाहिए, मगर ज्यादातर सीएचसी पर एक चिकित्साधिकारी की ही तैनाती है। प्रमुख सीएचसी पर दो या किसी पर तीन विशेषज्ञ हैं। शेष कार्य एएनएम और पैरामेडिकल स्टाफ के भरोसे ही चल रहा है।
कोविड अस्पताल में धूल फांक रहे उपकरण
वर्षों से संचालन का इंतजार कर रहे तीन सौ बेड कोविड अस्पताल को कोविड काल में कोरोना संक्रमितों के लिए खोला गया था। आईसीयू, सीसीयू, बच्चा वार्ड में अब तक चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। कोविड महामारी के दौरान वेंटिलेटर के अभाव में जब मरीजों की सांसें थम रही थी, तब भी अस्पताल में 36 वेंटिलेटर बंद पड़े थे। ओपीडी शुरू हुई पर दवाओं व उपकरणों की कमी से मरीज भटक रहे हैं।
ऑक्सीजन प्लांट से लैस हैं अस्पताल
जिला महिला अस्पताल, तीन सौ बेड अस्पताल, इफको आंवला परिसर समेत चार सीएचसी पर ऑक्सीजन प्लांट लग चुके हैं। जिला अस्पताल में प्लांट लगाने के लिए शासन ने स्वीकृत दे दी है। 50 बेड से अधिक क्षमता वाले सभी निजी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन प्लांट लग चुके हैं। बावजूद चिकित्सक की कमी से मरीज रेफर हो रहे हैं।
दस साल में बन गए 70 निजी अस्पताल
आईएमए अध्यक्ष डॉ. विनोद पागरानी के मुताबिक बरेली में 300 निजी अस्पताल हैं। पिछले दस साल में 70 नए निजी अस्पताल, नर्सिंग होम बने हैं। पहले दो मेडिकल कॉलेज थे पर अब एक और मेडिकल कॉलेज बन चुका है। कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट के विशेषज्ञ चिकित्सक और सर्जन अब जिले में हैं। महानगरों की तर्ज पर बरेली के निजी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं बढ़ रही हैं।
एक नजर में
– 50 लाख है जिले की आबादी
– 71 स्वास्थ्य केंद्र हैं जिले में
– 16 सीएचसी पर 230 चिकित्सकों के पद स्वीकृत
– 148 चिकित्सक तैनात, 14 चिकित्सक नहीं लिए चार्ज
– जिला अस्पताल में स्वीकृत 43 पद के सापेक्ष 30 चिकित्सक तैनात
– महिला अस्पताल में 16 के सापेक्ष छह महिला डॉक्टर हैं तैनात
– 300 निजी अस्पताल जिले में, 14 हजार प्रतिदिन की ओपीडी



