बरेली

Bareilly News: सस्ते हॉलीडे पैकेज का लालच देकर करते थे ठगी, छह गिरफ्तार

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बरेली। सस्ते हॉलीडे पैकेज का लालच देकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के छह सदस्यों को एसटीएफ लखनऊ की साइबर सेल ने बारादरी थाना क्षेत्र के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया। ये बड़े लोगों को सस्ते हॉलीडे पैकेज का झांसा देकर एडवांस रकम लेकर खिसक जाते थे। महिला डायरेक्टर समेत 14 लोगों के खिलाफ बारादरी थाने में रिपोर्ट कराई है।

लखनऊ एसटीएफ की साइबर सेल को सूचना मिली कि ठगी करने वाला गिरोह बरेली के होटल स्काई लार्क में ठहरा है। टीम ने बरेली एसटीएफ व बारादरी थाना प्रभारी अभिषेक सिंह के साथ छापा मारकर गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ लखनऊ के एसआई पंकज कुमार सिंह ने बारादरी थाने में गिरोह के छह सदस्यों पर मुकदमा दर्ज कराया है।

प्रतिष्ठित लोगों का डाटा जुटाकर बनाते थे शिकार

ठगी करने वाले गिरोह ने पूछताछ में एसटीएफ को बताया कि वे होटल, रिसॉर्ट, कार एजेंसियों और कॉलोनी सोसायटी से प्रतिष्ठित और अमीर लोगों का व्यक्तिगत डाटा अवैध तरीके से हासिल करते थे, फिर उनके नंबरों पर कॉल करके सेमिनार के बहाने बुलाते थे। बेहद कम खर्चे में देश-विदेश में हॉलीडे पैकेज, फिल्मों के टिकट, प्रतिष्ठित होटलों में लंच और डिनर कराने का झांसा देकर ठगी करते थे। उदाहरण के तौर पर किसी को पांच साल तक प्रतिवर्ष सात दिन का हॉलीडे पैकेज देना हो तो उसका खर्च पांच लाख रुपये आता है। उसे यह अधिकतम 75 हजार रुपये में एडवांस बुक करके पूरी रकम ले लेते थे। बाद में उस शहर या उस होटल में आते ही नहीं थे और दो-तीन माह में नंबर भी बंद कर लेते थे।

कंपनी का नाम-पता फर्जी मिला

लोगों को झांसे में लेने के लिए लाइमवुड हॉलीडे प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्जी कंपनी नोएडा के पते पर आरओसी कानपुर में रजिस्टर्ड करा रखी थी। जानकारी करने पर पता चला की उस पते पर जो कंपनी है, उसकी स्पेलिंग में मामूली अंतर है। ठगों की कंपनी का जीएसटी पंजीकरण आदि भी जाली ही मिला।

गिरोह में बिहार और यूपी के लोग शामिल

गिरफ्तार किए गए ठगी के आरोपी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इनमें बिहार के गया जिला के सरेवां निवासी दीपक कुमार कुशवाह शामिल है, जो फिलहाल बी-105, आरकेपुरम, थाना सेक्टर-12, नई दिल्ली में रहता है। यह फर्जी कंपनी का एडमिन मैनेजर है। सेल्स मैनेजर के तौर पर देवरिया के थाना खुखुंदू के बिरजापुर निवासी अतुल कुमार मौर्य, देवरिया के ही थाना बरहज के गांव सिसई गुलाब राय निवासी संतोष कुमार कुशवाहा, गाजीपुर के थाना मरदह के फेंफरा निवासी रतीष सिंह, कुशीनगर के थाना पटहेरवा के नाथा पट्टी निवासी रहमतुल्ला मिलकी, कुशीनगर के ही थाना पटहेरवा के गांव बिहार बुजुर्ग निवासी शमशेर आलम शामिल हैं।

गिरोह का सरगना और असली खिलाड़ी बाहर, तलाश जारी

मौके पर पकड़े गए आरोपियों में केवल दीपक ही असली गिरोह का सदस्य है। बाकी लोगों को 25 फीसदी कमीशन पर रखा गया था। बाकी रकम फर्जी कंपनी के खाते में भेजना दिखाया जाता था। गिरोह का सरगना रवि कुमार राजपूत बताया जा रहा है। इसके साथ ही गौतम बुद्ध नगर का अमित कुमार, अमित की पत्नी सविता नागपाल व राहुल दीक्षित भी मुख्य आरोपी हैं जो फिलहाल दिल्ली और भोपाल में हैं। इनके अलावा आनंद कुमार, मेघना, हिमांशु और चंदन तिवारी समेत आठ लोगों की एसटीएफ को तलाश है।

फर्जी दस्तावेज और डिवाइस का जखीरा मिला

एसटीएफ ने आरोपियों के पास से एक मॉडम, पेनड्राइव, 3 लैपटॉप, 2 मोहर, एक स्टांप पेपर, 4 स्वैप मशीन, 3 डायरी, 8 मोबाइल फोन, 14 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 2 क्यूआरकोड, 143 भरे हुए फाॅर्म, 5 बुकलेट, लाइमवुड कंपनी के 7 सादा एग्रीमेंट फाॅर्म, 9 ई स्टांप सादा, 8 प्रॉसपेक्टस बुकलेट, 9 बिजनेस डाटा, 8 मेंबरशिप कार्ड, एक रसीद बुक, 3 वोटर आईडी कार्ड और 650 रुपये बरामद किए हैं।

कई राज्यों में लोगों को लगाया चूना

ठगों ने एक साल में रोहतक, गुरुग्राम, लुधियाना, जबलपुर, काशीपुर, इटारसी, कटनी, सतना, भोपाल, रुद्रपुर, हल्द्वानी, पीलीभीत, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बरेली में लोगों से ठगी की। इन लोगों ने लाइमवुड हॉलीडे के अलावा बीच वेस्टिन इंटरनेशनल क्लब, इलाइट क्लब, आरसीआई हॉलीडे, डी ओबराय कोर्टयार्ड, मौर्या हॉलीडे नाम की फर्जी कंपनियां बनाकर लोगों को लाखों रुपये का चूना लगाया।

वर्जन

यह गिरोह दूसरे प्रदेशों में ज्यादा सक्रिय था। इनपुट के आधार पर लखनऊ एसटीएफ ने स्थानीय यूनिट व बारादरी पुलिस के सहयोग से गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। – राहुल भाटी, एसपी सिटी बरेली

फोन पर बात कर रही महिला की ट्रेन से कटकर मौत

बरेली। ट्रेन की टक्कर लगने से इज्जतनगर थाना क्षेत्र में महिला की मौत हो गई। इज्जतनगर के गायत्री नगर की गली नंबर 13 की रहने वाली भगवान देवी भोजीपुरा की फैक्टरी में काम करती थीं। शुक्रवार शाम वह फैक्टरी से घर लौट रही थीं। गायत्री नगर के पास रेलवे ट्रैक पार करते समय इज्जतनगर की तरफ से आ रही ट्रेन से उनको टक्कर लग गई। सिर में चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वह फोन पर बात कर रही थीं, इसलिए ट्रेन की आवाज नहीं सुन सकीं। सूचना पर महिला के पति राकेश भी पहुंच गए। ब्यूरो

भ्रष्टाचार उजागर: पात्र को अपात्र दर्शाने पर ग्राम पंचायत सचिव निलंबित

बरेली। प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्र को अपात्र दर्शाने पर ग्राम पंचायत सचिव नन्हे खां को निलंबित कर दिया गया है। डीएम के आदेश पर डीपीआरओ ने निलंबन जारी किया। पंचायत सचिव को निलंबन अवधि में भोजीपुरा ब्लॉक से संबद्ध किया गया है।

दमखोदा ब्लॉक के गांव बेरिया जशोदा की पुष्पा देवी ने 10 मार्च को डीएम को बताया था कि पंचायत सचिव को सुविधा शुल्क न देने की वजह से उसका और उसके पति का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्रता की सूची से काट दिया है, जबकि पति के दोनों भाइयों को आवास दे दिया गया। जबकि तीनों के घर एक जैसे ही थे। डीएम के आदेश पर डीआरडीए के परियोजना निदेशक तेजवंत सिंह ने स्थलीय जांच की। जांच में आरोप सही पाए गए। डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि सचिव को निलंबित कर दिया गया है। ब्यूरो

ई-काॅमर्स सेंटर बनकर तैयार… कारीगरों को शुरुआत का इंतजार

फोटो

– श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन के अंतर्गत दो करोड़ रुपये की लागत से बना है सेंटर

अमर उजाला ब्यूरो

बरेली। श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन के तहत फरीदापुर इनायत खां में दो करोड़ रुपये की लागत से ई-काॅमर्स सेंटर बनाया गया है। अभी तक न तो इसका बिजली कनेक्शन जुड़ सका, न ही संचालन शुरू सका है। निर्माण पूरा हुए तीन महीने हो चुके हैं। जरी और बेंत कारीगरों को इसके शुभारंभ का इंतजार है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन के तहत जिले की 13 ग्राम पंचायतों का समूह बनाकर उड़ला जागीर के नाम से क्लस्टर बनाया गया है। गांव में रोजगार के अवसर और अन्य सुविधाएं विकसित करने के लिए 71.42 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाओं पर अमल हुआ।

एक जुलाई 2023 तक इसमें 69 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसी परियोजना के तहत फरीदापुर इनायत खां में जरी व बेंत के कारीगरों के लिए ई-काॅमर्स सेंटर विकसित किया गया है। इसके निर्माण पर 1.19 करोड़ रुपये और मशीनों पर 80 लाख रुपये खर्च हुए हैं। मशीनें आ गईं हैं पर काम शुरू नहीं हो सका है।

कोट

मार्च 2023 में ई-काॅमर्स सेंटर को शुरू करना था, लेकिन निकाय चुनाव के चलते निजी संस्था का चयन नहीं हो सका। इसके संचालन और मेंटीनेंस के लिए टेंडर निकाले जा चुके हैं। जल्दी ही पांच वर्ष के लिए निजी संस्था का चयन होगा। कारीगरों को लाभ मिलेगा। – ऋषि रंजन गोयल, संयुक्त निदेशक उद्योग

सेंटर में होंगी ये सुविधाएं

जरी-जरदोजी की डिजाइन बनाने और कटिंग के लिए मशीन लग गई हैं। लकड़ी में डिजाइन बनाने के लिए भी मशीन लगी हैं। कंप्यूटर, इंटरनेट की सुविधायुक्त ऑफिस व डिस्प्ले रूम हैं। जल्दी ही कारीगरों के उत्पादों को ई-कॉमर्स साइटों के जरिये अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऑनलाइन डिस्प्ले किया जा सकेगा। जरी-जरदोजी के काम के लिए 20 अड्डे बनाए गए हैं। 13 ग्राम पंचायतों के कारीगर प्राथमिकता के आधार पर यहां लाभ पा सकेंगे।

इन गांवों में लागू हुआ मिशन

उड़ला जागीर, उदयपुर, जसरथपुर, सिमरा अजूबा बेगम, पुरनापुर, परसोना, पदातसपुर, पदारथपुर, नरियावल, बिथरी चैनपुर, फरीदापुर इनायत खां, आलमपुर गजरौला, भिंडोलिया।

मुख्य सेविकाओं के 89 पद खाली… नहीं हो रही आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी

– 104 की जगह सिर्फ 15 मुख्य सेविकाओं की है तैनाती

अमर उजाला ब्यूरो

बरेली। बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण और निगरानी के लिए प्रत्येक 25 केंद्र पर एक सुपरवाइजर (मुख्य सेविका) का पद स्वीकृत है। जिले में मानक के हिसाब से 104 सुपरवाइजर होने चाहिए पर 89 पद खाली हैं। सिर्फ 15 सुपरवाइजर तैनात हैं।

2,857 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत 3,52,223 लाभार्थियों को पोषण संबंधी सेवाओं का लाभ सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सुपरवाइजर की होती है। पद खाली होने से निगरानी कागजों पर हो रही है। बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबीरानी मौर्य आई थीं तो उनके सामने भी बेहतर सेवाओं का दावा कर अधिकारियों ने अपनी पीठ थपथपाई थी, लेकिन मंत्री इससे संतुष्ट नहीं हुईं। सुधार के निर्देश देकर गई थीं।

मझगवां और फरीदपुर विकास खंड में एक भी सुपरवाइजर नहीं

मझगवां और फरीदपुर विकास खंड में एक भी सुपरवाइजर नहीं हैं। जून में जिले में 21 सुपरवाइजर थीं, लेकिन पांच दूसरे जनपदों को स्थानांतरित हो गईं। एक सेवानिवृत हुईं तो 15 ही रह गईं। विभागीय जानकारी के मुताबिक 2005 से नियुक्तियां नहीं हुईं और साल दर साल सेवानिवृत्त होने से संख्या घटती रही। इस बीच लाभार्थी संख्या बढ़ी। इसलिए निगरानी की जरूरत ज्यादा थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

इन्हें मिलती हैं सेवाएं

शून्य से छह महीने व 3-6 वर्ष तक तक के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को आंगनबाड़ी केंद्रों से पोषाहार दिया जाता है। मुख्य सेविका को प्रतिमाह 15 आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करना होता है। मुख्य सेविकाएं कम होने से एक सेविका पर 25 से अधिक केंद्रों की जिम्मेदारी है। इसलिए कागजी काम को बढ़ावा मिल रहा है। जमीनी हकीकत परखने के लिए निरीक्षण न के बराबर हैं।

कोट

रिक्त पदों की सूचना शासन को प्रतिमाह भेजी जाती है। भर्ती शासन स्तर से ही होनी है। मैं उपलब्ध मुख्य सेविकाओं को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर बेहतर तरीके से सेवाएं देने का प्रयास कर रहा हूं। – कृष्ण चंद्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी


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