Bareilly News: कर्मचारी कम होने से दबाव… लक्ष्य पूरे न होने पर कार्रवाई की तलवार
बरेली। शहर व देहात के किसी भी बिजली उपखंड में जेई के अधीनस्थ कर्मचारियों की संख्या पूरी नहीं है। राजस्व वसूली और फाल्ट ठीक करने के लिए समयबद्ध तरीके से काम कराने का दबाव है। कर्मचारी न होने पर मिनटों के काम घंटों में होते हैं। देरी को लेकर डांट फटकार हो रही है। इसे जेई शमशुल इस्लाम के जहरीला पदार्थ खाने की घटना से जोड़कर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कर्मचारियों की संख्या कम होने का मुद्दा उठाया है।
समिति के संयोजक गौरव शर्मा ने बताया राजस्व वसूली के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अभियंताओं से पहले ही एमओयू (सहमति पत्र) पर हस्ताक्षर कराए जा चुके हैं। भीषण गर्मी का दौर है। शहर में दो लाख उपभोक्ता और करीब दस लाख आबादी को बिजली देनी है। आपूर्ति और राजस्व वसूली दोनों ही काम अहम हैं। अगर कर्मचारियों की संख्या को पूरा नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में दिक्कत होगी। विद्युत संयुक्त संषर्ष समिति मुख्य अभियंता को यह समस्या अवगत करा चुकी है। इसके बाद अभियंताओं और वरिष्ठ अधिकारियों में बहस छिड़ गई। एक बड़े अधिकारी ने स्टाफ की कमी से पैदा हुई समस्याओं का जवाब देने के स्थान पर कहा कि दबाव तो उन पर भी है। तो क्या जहरीला पदार्थ खा लेना भी समाधान है?
यह है मानक
पावर कॉरपोरेशन के मुताबिक प्रत्येक उपकेंद्र के लिए कम से कम पांच टीजी टू, सात लाइन और 14 हेल्पर (सहायक) होने चाहिए। प्रत्येक फीडर में फाल्ट ठीक करने और बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए एक टीजी टू, एक लाइनमैन, दो पेट्रोल मैन होने चाहिए। शहर के किसी भी सब स्टेशन पर स्टाफ के इस मानक का पालन नहीं हो रहा है।
भुता में काम के दबाव की वजह से जेई ने जहरीला पदार्थ खाया। दबाव भी इस वजह से बना, क्योंकि काम कराने के लिए स्टाफ की कमी है। इस पर अफसरों का कोई ध्यान नहीं है। अफसर हर दोपहर योजनाओं की प्रगति के आंकड़े तलब कर रहे हैं।
गौरव शर्मा, संयोजक विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति



