Bareilly News: सरकारी खर्चे पर क्यों नहीं पकड़े जा रहे बंदर, आज होगी सुनवाई
बरेली। बंदरों के उत्पात से परेशान किसान ने सिविल जज की अदालत में मुकदमा दायर करके कहा कि जब सरकारी खर्चे पर अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर गोशालाओं में रखा जा रहा है तो फिर बंदरों को क्यों नहीं पकड़वाया जा रहा है। मामले में आज सुनवाई होनी है।
ख्वाजा नगर नकटिया के 71 वर्षीय मोहम्मद इकबाल ने कोर्ट में मुकदमा दायर करते हुए कहा कि बिथरीचैनपुर के गांव सिमरा अजूबा बेगम में उनका 40 बीघे का आम का बाग है। इसमें करीब 500 बंदरों का जमावड़ा रहता है। वे फसल और बाग को नुकसान पहुंचाते रहते हैं। इन बंदरों को सरकारी खर्चे पर पकड़वाने के लिए उनकी ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी इसकी शिकायत की थी। प्रभागीय वन अधिकारी को इसकी जांच दी गई। जांच में उनकी ओर से लिखा गया कि गांव में 200 बंदर मौजूद हैं। इन बंदरों को ग्राम पंचायत अपने खर्चे पर पकड़वाए।
मोहम्मद इकबाल ने इस मामले में प्रदेश सरकार के अलावा उपजिलाधिकारी, प्रभागीय वन अधिकारी व प्रमुख सचिव वन को पक्षकार बनाया है।
गांव में बंदरों का आतंक
मोहम्मद इकबाल ने बताया कि गांव सिमरा अजूबा बेगम में बंदरों ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है। घरों में से आटा, रोटी, चावल, कपड़े, जूते आदि छीनकर भाग जाते है। सब्जी, फल, फूल आदि को नष्ट कर देते हैं। वादी के बाग के आम चार लाख रुपये में बिक जाते थे, लेकिन बंदरों के आतंक के चलते खरीदार नहीं मिल रहे हैं। पेड़ भी सूख रहे हैं। उन्होंने सरकारी खर्चे पर बंदरों को पकड़वाकर दूर के किसी जंगल में छुड़वाने की व्यवस्था करने की मांग की है।



