मूट कोर्ट : टीम कोड तीन बनी विजेता, कोड छह रनरअप
बरेली। बरेली कॉलेज के विधि विभाग में मूट कोर्ट के दूसरे दिन नाबालिग द्वारा अंतरजातीय प्रेम प्रसंग, विवाह और पारिवारिक विवाद के प्रकरण पर विद्यार्थियों ने विधिक राय दी। 14 टीमों ने क्रमवार प्रस्तुतियां दीं। इसमें टीम कोड तीन विजेता, कोड छह उपविजेता रही।
विधि छात्रों को मूट कोर्ट अभ्यास में हाईकोर्ट के समक्ष अपील में अपना पक्ष कैसे रखते हैं, इसकी बारीकियां सीखने का मौका मिला। 17 वर्षीय किशोरी के अपहरण के मामले में सजा के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की सुनवाई के दौरान विधि छात्रों ने अपीलकर्ता और बचाव पक्ष की ओर से दलीलें दीं। उन्होंने पूर्व में हुए निर्णयों का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपनी बात क्रमवार रखी। एक-एक कर 14 टीमों के 42 प्रतिभागियों ने प्रस्तुति दी।
आखिर में टीम कोड-3 में शामिल अमित कुमार, राजीव कुमार, ईशा पांडेय विजेता, टीम कोड-6 की मानसी खन्ना, युक्ता माहेश्वरी, कामेश्वरी उप विजेता बनीं। बेस्ट मेमोरियल का अवॉर्ड टीम कोड-8 के सदस्य भूपेंद्र कुमार, प्रतीक शर्मा, दिव्या यादव ने जीता। बेस्ट स्पीकर सुजाता शर्मा, अपूर्वा शर्मा रहे। बेस्ट रिसर्चर के सम्मान से कामेश्वरी नवाजी गईं।
मूटकोर्ट के जज के रूप में सहायक प्रोफेसर विपिन कुमार, डॉ. शीतल गुप्ता, डॉ. अर्पित यादव थे। विधि विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार के निर्देशन व लीगल एड क्लीनिक के सचिव डॉ. संजय कुमार यादव के परामर्श में मूट कोर्ट का आयोजन हुआ। संयोजक एडवोकेट टीडी भास्कर (अतिथि प्रवक्ता) ने दो दिवसीय प्रतियोगिता का संचालन किया।
क्या है मूट कोर्ट
विधि के विद्यार्थियों का आभासीय न्यायालय मूट कोर्ट कहा जाता है। इसमें विद्यार्थी वकालत का प्रयोगात्मक कौशल सीखते हैं, ताकि एलएलबी पास कर जब वे कोर्ट पहुंचे तो उन्हें केस फाइल करने, बहस आदि के बारे में एक अधिवक्ता की तरह पूरी जानकारी रहे।



