Budaun News: एडीसीओ ने सचिव समेत कर्मचारियों से पूछा, कहां से आई थी डीएपी

उझानी के गांव बुटला में डीएपी वितरण की जांच करते एडीसीओ संजीव पांडेय। संवाद
उझानी। बुटला क्षेत्रीय सहकारी समिति पर बिना आवंटन के किसानों को डीएपी बांट दिए जाने के मामले में एआर कोऑपरेटिव महेंद्र सिंह के आदेश पर मौके पर जांच के लिए रविवार को एडीसीओ संजीव पांडेय पहुंचे। उन्होंने किसानों के बयान दर्ज करने के बाद सचिव समेत कर्मचारियों से भी जानकारी की। डीएपी कहां से लाई गई, इसे लेकर दूसरे दिन भी पसोपेश के बीच किसानों को जहां डीएपी में मिलावट तो सचिव समेत कर्मियों को कार्रवाई का डर सताने लगा है।
समिति के गोदाम पर शुक्रवार तड़के डीएपी बांटी गई थी। डीएपी बांटे जाने के बाद सभापति समेत किसानों को जब यह पता लगा कि डीएपी का विभागीय स्तर से आवंटन नहीं हुआ है तो गोलमाल का भंडाफोड़ हो गया। सभापति की एआर कोऑपरेटिव महेंद्र सिंह से शिकायत के बाद पूरी तरह साफ हो गया कि बुटला समिति को काफी पहले से डीएपी आवंटित नहीं हुई है। फिर, किसानों के लिए डीएपी कहां से बांट दी गई। एआर सिंह ने आननफानन में शनिवार शाम अपनी ओर से आदेश जारी कर एडीसीओ संजीव पांडेय को जांच सौंप दी गई थी। जांच को मौके पर पहुंचे एडीसीओ ने 20 से अधिक किसानों से जानकारी कर उनके बयान भी दर्ज किए।
स्थलीय जांच के दौरान एडीसीओ पांडेय ने सभापति हीरालाल वर्मा, सचिव शेषनारायण यादव, आंकिक राजीव यादव उर्फ डेविड समेत कर्मचारियों का पक्ष भी सुना। सचिव समेत कर्मचारियों ने डीएपी कहां से लाकर बांटी गई, इसका जवाब अभी तक लिखित में जांच अधिकारी एडीसीओ का नहीं दिया है। किसानों में चंद्रपाल और मुन्नालाल ने यह भी कहा कि जिन किसानों को डीएपी मिली है, उसकी गुणवत्ता की विभाग को जांच करानी चाहिए। एडीसीओ ने बताया कि उन्होंने जांच पूरी कर ली है। वह जांच रिपोर्ट सोमवार को एआर कोऑपरेटिव के समक्ष प्रस्तुत कर देंगे। उन्होंने जांच के दौरान मौके पर सामने आए तथ्यों के बारे में जानकारी देने से इंकार कर दिया।
एक बार पहले भी बांटी जा चुकी है खाद : बुटला क्षेत्रीय सहकारी समिति पर बिना आवंटन के खाद बांटे जाने की शोर पहले भी मचा था। बताते हैं कि उस वक्त विभागीय स्तर से करीब डेढ़ सौ कट्टे भेजे गए थे, लेकिन वितरण चार से अधिक किसानों को किया गया था। बाकी खाद कहां से आई, इसे लेकर हकीकत सामने नहीं आ पाई थी। किसानों की ओर से विभागीय अफसरों को शिकायत भी नहीं की गई थी। बताते हैं कि समिति के एक कर्मचारी की खाद विक्रेताओं से गहरी पैंठ है। विभाग के अफसर इस हकीकत से वाकिफ हैं।