Budaun News: गांवों में सर्वे के लिए मांगे 50 डीबीसी
अभी गांव-गांव जाकर 17 टीमें कर रहीं काम
अभी तक डेंगू के तीन, मलेरिया फेल्सीपेरम के छह और वाईवैक्स के 190 मरीज मिले
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिले में मलेरिया को नियंत्रित करने के लिए मलेरिया विभाग की टीमें काम तो कर रही हैं लेकिन इसमें डीबीसी (डेली ब्रीडिंग चेकर्स) की कमी आड़े आ रही है। ऐसे में विभाग ने 50 डीबीसी उपलब्ध कराने की मांग शासन से की है। फिलहाल इस सीजन में अभी तक डेंगू के तीन, मलेरिया फेल्सीपेरम के छह और मलेरिया वाईवैक्स के 190 मरीज मिले हैं।
मलेरिया की रोकथाम के लिए सबसे पहले लार्वा को नियंत्रित करना जरूरी है। इसके लिए मलेरिया विभाग द्वारा जिले में डीबीसी की 17 टीमें काम कर रही हैं। एक टीम में दो डीबीसी हैं जो अपने इलाके में घर घर जाकर ब्रीडिंग की जांच कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें लोगों के घरों में लगे कूलरों के अलावा छत पर रखी पानी की टंकी और अन्य बर्तनों आदि की जांच कर यह पता लगाना होता है कि वहां डेंगू फैलाने वाले मच्छरों की ब्रीडिंग तो नहीं हो रही है। विभाग की इस साल की रिपोर्ट पर गौर करें तो मलेरिया फेल्सीपेरम के दो मरीज मार्च में तथा चार मरीज पिछले जुलाई के महीने में मिले हैं। मलेरिया वाईवैक्स के कुल 190 मरीजों में 103 मरीज केवल जुलाई में ही मिले हैं।
चूंकि बारिश का यह सीजन मलेरिया के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है, इसलिए मलेरिया विभाग की कोशिश है कि इस बार पिछले सालों की तरह मलेरिया लोगों की मौत का कारण नहीं बने। इसलिए गांव गांव जाकर टीमें सर्वे कर न सिर्फ लार्वा नष्ट कर रही हैं, बल्कि लोगों को जागरूक भी कर रही हैं। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत के अनुसार, 17 टीमें काम कर रही हैं, लेकिन यह अपर्याप्त हैं। ऐसे में शासन को लिखकर 50 डीबीसी की मांग की गई है ताकि उन्हें गांव गांव भेजा जा सके।
अब तक डेंगू के भी मिले तीन मरीज
– इस साल अब तक डेंगू के लिहाज से भी स्थिति नियंत्रण में दिखाई दे रही है। अब तक डेंगू के केवल तीन मरीज मिले हैं जबकि पिछले साल 579 मरीज डेंगू के मिले थे, जिनमें कई की मौत हो गई थी। साल 2021 में यही आंकड़ा 471 मरीजों का था। इसके अलावा पिछले साल जिले में तीन मरीज जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) के भी पाए गए थे। इस बार विभाग ऐसी स्थिति नहीं आने देना चाहता, ऐसे में तेजी से लार्वा नियंत्रण का काम किया जा रहा है।