Budaun News: एक रुपये के पर्चे पर इलाज कराना है तो किराये पर 100 रुपये खर्च करिए

रन सिंह।(सीएचसी की खबर के साथ)
बदायूं/इस्लामनगर। सरकारी अस्पताल में एक रुपया खर्च करके इलाज की सुविधा लेने के लिए इस्लामनगर और उसके आसपास गांवों के मरीजों को किराये में 100 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने इस्लामगर ब्लॉक मुख्यालय से हटाकर सीएचसी 10 किमी दूर रुदायन कस्बे में बना दी है। ऐसे में मरीज सीएचसी जाकर इलाज कराने के बजाय झोलाछापों से इलाज कराने पर मजबूर हैं।
इस्लामनगर कस्बे की जनसंख्या लगभग 70 हजार है। पहले यहां पीएचसी थी। यहां आसपास के लगभग 50 गांवों के लोग दवा लेने आते थे। लोगों को आसानी से स्वास्थ्य सेवाएं मिल जाती थीं। वर्ष 2005 में सरकार ने नगर पंचायत प्रशासन से सीएचसी के लिए जगह मांगी, लेकिन जगह उपलब्ध नहीं हो सकी। वर्ष 2015 में नगर पंचायत रुदायन ने सीएचसी के लिए जगह उपलब्ध करा दी। इसके बाद रुदायन में इस्लामनगर के नाम से सीएचसी बना दी गई।
करीब तीन साल पहले तत्कालीन चिकित्साधिकारी डॉ. नीरज भारती ने पीएचसी के स्टाफ को ले जाकर सीएचसी शुरू करा दी। उस समय इस्लानगर समेत आसपास गांवों के लोगों ने इसका विरोध किया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने उनकी एक न सुनी। इसके बाद से ही इस्लामनगर और आसपास गांवों के लोगों की दिक्कतें बढ़ गईं। मरीज इलाज के लिए रुदायन जाने से कतराने लगे।
दरअसल, नगर पंचायत रुदायन की इस्लामनगर से दूरी लगभग 10 किमी है जबकि ब्लॉक क्षेत्र के करीब 50 गांवों की दूरी तो 25 से 30 किलोमीटर है। रुदायन कस्बा बिल्सी-बदायूं मार्ग से करीब चार किमी अंदर है। ऐसे में किसी भी मरीज को वहां तक पहुंचने में ही कम से कम सौ रुपये किराए पर खर्च करने होते हैं। ऐसे में मरीज एक रुपये का पर्चे पर इलाज की सुविधा लेने के लिए 100 रुपये खर्च करके वहां जाना पसंद नहीं करते।
महिला विंग बनी सफेद हाथी, सुविधाएं नाकाफी
इस्लामनगर कस्बे के बीचोंबीच पांच करोड़ की लागत से बनी महिला विंग को शुरू कर दिया गया हैै। इसमें एक महिला बीयूएमएस डॉक्टर व कुछ कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, मगर सुविधाएं नाकाफी हैं। लोगों का कहना है कि यहां कम से कम एक एमबीबीएस डाॅक्टर होना ही चाहिए। इधर, सीएचसी पर ब्लड की सामान्य जांचें तो उपलब्ध हैं लेकिन एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड नहीं होता। यहां दो एमबीबीएस डॉक्टर व दो बीयूएमएस डॉक्टर व एक फार्मासिस्ट है।
इलाज के लिए सीएचसी जाने का मतलब- समय और पैसे की बर्बादी
कस्बे से रुदायन की दूरी लगभग 10 किलोमीटर है। इससे लोगों को जाने-आने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहां पहुंचने के लिए टेंपो और डग्गामार ही सहारा हैं। वहां जाने पर पैसे और समय दोनों की बर्बादी होती है। – प्रवीण गुप्ता, इस्लामनगर
जितना किराया लगाकर रुदायन जाएंगे, उतने रुपये में दवा कस्बे में ही किसी डाॅक्टर से ले लेते हैं। इससे परेशानी भी नहीं होती है और फिर सीएचसी पहुंचकर इलाज मिल ही जाएगी, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। – रनसिंह, महरोला
– पहले पीएचसी इस्लामनगर में ही थी, जिससे परेशानी नहीं होती थी। यहां मरीज भी ज्यादा आते थे लेकिन रुदायन में सीएचसी बनने के बाद मरीज वहां तक नहीं पहुंच पाते हैं। गंभीर मरीजों का तो वहां पहुंचना नामुमकिन सा ही है। – सचिन शर्मा, अल्लेहपुर
रुदायन जाने में किराया तो ज्यादा लगता ही है, सड़कें भी ठीक न होने के कारण काफी परेशानी होती है। ऐसे में जब बीमार होते हैं तो आसपास के डॉक्टरों से ही दवा ले लेते हैं। 100 रुपये खर्च करके सीएचसी जाकर दवा लेने की कोई तुक नहीं है। – श्यामसुंदर राणा, मढै़या
सीएचसी पर मैं स्वयं व एक अन्य एमबीबीएस डॉक्टर हैं। स्टाफ की कमी है, ऐसे में इस्लामनगर महिला विंग पर एमबीबीएस डॉक्टर को नहीं भेज सकते। फिलहाल अभी एक बीयूएमएस डाॅक्टर व कुछ नर्सों को वहां तैनात किया है, जो मरीजों का उपचार करती हैं। – डॉ. रोहित पटेल, प्रभारी चिकित्साधिकारी

रन सिंह।(सीएचसी की खबर के साथ)

रन सिंह।(सीएचसी की खबर के साथ)

रन सिंह।(सीएचसी की खबर के साथ)

रन सिंह।(सीएचसी की खबर के साथ)