Budaun News: समितियों पर डीएपी नहीं, दुकानों पर 250 रुपये तक ज्यादा दाम

खाद की दुकान। संवाद
बदायूं। इन दिनों किसान गेहूं की बुआई में व्यस्त हैं, लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल रही है। बिना डीएपी के गेहूं बोने पर किसानोंं को उपज प्रभावित होने की आशंका रहती है। जिले की सहकारी समितियों पर फिलहाल डीएपी उपलब्ध नहीं है। किसानों को मजबूरी में दुकानों से ढाई सौ रुपये अधिक कीमत पर डीएपी खरीदनी पड़ रही है। गेहूं की बुआई शुरू होने से पहले जिम्मेदार जिले में डीएपी का पर्याप्त स्टॉक होने और किसी तरह की किल्लत न होने देने के दावे कर रहे थे, लेकिन किसान डीएपी के लिए मारे घूम रहे हैं।
प्रशासनिक अनदेखी कहें या फिर खाद व्यापारियों को फायदा पहुंचाने की मंशा, किसानों को तो डीएपी की किल्लत से जूझना ही पड़ रहा है। वजह है कि जिले में समितियों और एग्रो सेंटरों पर काफी समय से डीएपी की खेप नहीं पहुंची है। पिछले महीने तो कम ही सही, लेकिन फिर भी समितियों पर डीएपी मिल गई थी। 10 दिन से तो किसान डीएपी के लिए बेहद परेशान हैं।
इसका कारण यह है कि रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुआई का समय चल रहा है। अच्छी उपज लेने के लिए किसान गेहूं के बुआई डीएपी के साथ ही करते हैं, लेकिन इस जिले की सभी सहकारी समितियों पर खाद का संकट है। डीएपी का जो स्टॉक था, वह भी पूरी तरह खत्म हो गया है। डीएपी का सरकारी रेट 1350 रुपये प्रति कट्टा है, जबकि दुकानों पर 1600 रुपये तक बेचा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, डीएपी की रैक आने में दो-तीन दिन का समय लग सकता है।
छोटे किसान बिना डीएपी के गेहूं बो रहे
संपन्न किसान तो दुकानों से महंगे दामों पर डीएपी खरीदकर गेहूं की बुआई कर रहे हैं, लेकिन कर्ज लेकर खाद-बीज जुटाने वाले छोटे किसान समितियों पर खाद न मिलने से गेहूं की बुआई बिना डीएपी के ही करने को मजबूर हैं। समितियों से जुड़े किसानों को गेहूं की बुआई के लिए डीएपी उधार मिल जाती है। फसल तैयार हो जाने पर वे ब्याज सहित भुगतान कर देते हैं। दुकानों से तो उन्हें नकद ही डीएपी लेनी होगी, वह भी 250 रुपये कट्टा महंगी।
किसान बोले- बढ़ रहा आर्थिक संकट
– डीएपी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दामों पर डीएपी खरीदनी पड़ रही है। इससे आर्थिक संकट बढ़ रहा है। फसल की लागत भी बढ़ रही है। – हरपाल सिंह, सिसौरा
– सहकारी समितियों पर डीएपी के लिए आज-कल करके टाला जा रहा है। पता नहीं कब तक डीएपी मिल सकेगी। कुछ फसल तो बिना डीएपी के ही बोनी शुरू कर दी है। दुकान से खरीदने के लिए रुपये ही नहीं हैं। – ज्ञानेश मिश्रा, सौंधामई
-कुछ समय से समितियों पर डीएपी खत्म हो गई है। 24 नवंबर तक जिले में डीएपी आ जाएगी। इसके बाद समितियों पर वितरण शुरू कर दिया जाएगा। तब किसानों को दिक्कत नहीं होगी। – महेंद्र सिंह, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक

खाद की दुकान। संवाद

खाद की दुकान। संवाद

खाद की दुकान। संवाद