Budaun News: सीएचसी व पीएचसी पर खराब जनरेटर पी रहे लाखों का तेल

03बीडीएन23आर- कादरचौक सीएचसी पर बंद पड़ा जनरेटर।संवाद
– कादरचौक सीएचसी पर 4.5 लाख की दिखाई गई है डीजल खरीद, जबकि जेनरेटर है ढाई साल से खराब
– जिले की अधिकांश सीएचसी-पीएचसी पर बिजली कटौती के बाद गर्मी से परेशान रहते हैं मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिले की सीएचसी-पीएचसी पर बिजली जाने के बाद मरीजों की सहूलियत के लिए जनरेटर लगाए गए थे, जो अधिकांश बरसों से ठप पड़े हैं। बावजूद इसके कागजों में डीजल खर्च लाखों में दिखाया जा रहा है। कादरचौक सीएचसी इसका ताजा उदाहरण है, जहां बीते ढाई साल से जनरेटर ठप पड़ा है, बावजूद इसके डीजल खर्च का बिल 4.5 लाख का है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होने का दावा स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार समय-समय पर करते रहते हैं। इसके बाद भी सिस्टम सही नहीं हो पा रहा है। सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्थाएं दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। सबसे ज्यादा वहां बिजली जाने के बाद मरीजों और स्टाफ को दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। सीएचसी या फिर पीएचसी पर मरीजों को बिजली कटौती के दौरान दिक्कतों का सामना न करना पड़े इसके लिए जो जनरेटर लगाए गए थे वह ठप पड़े हैं। अधिकांश सीएचसी पर जनरेटर ही खराब पड़े हैं। यहां हैरत की बात यह है कि ठप पड़े जनरेटरों में हर महीने डीजल डालकर कागजों में रुपया निकाला जा रहा है। इससे मरीजों को गर्मी में राहत नहीं मिल पा रही है।
सहसवान सीएचसी में खराब पड़ा जनरेटर भी पी रहा तेल
सहसवान सीएचसी में लगा जनरेटर भी काफी समय से खराब है। इस बात की पुष्टि वहीं का स्टाफ कर रहा है, इसके बाद भी हर महीने यहां तेल खरीदने की बात कही जा रही है। स्टाफ का कहना है कि जनरेटर काफी समय से उन्होंने चलते नहीं देखा, जबकि एमओआईसी डॉ. प्रशांत त्यागी का कहना है कि सीएचसी में इन्वर्टर लगा हुआ है, जरूरत पड़ने पर ही जनरेटर चलाया भी जाता है।
बिनावर सीएचसी में लगे दोनों जनरेटर रहते हैं बंद
बिनावर सीएचसी में 25-25 केवीए के दो जनरेटर लगे हैं। एक ऑक्सीजन की सप्लाई तो दूसरा अन्य जांचों के लिए है। मगर, दोनों ही बंद हैं। स्टाफ का कहना है कि यह जनरेटर लोड नहीं ले पाते हैं इसलिए उनको नहीं चलाया जा रहा है। यहां पर आने वाले मरीज बिजली जाने के बाद परेशान रहते हैं, जबकि एमओआईसी डॉ. नरेंद्र सिंह पटेल का कहना है कि डीजल के लिए अलग से बजट नहीं मिलता है। जरूरत पड़ने पर वह अपने पास से ही खरीदारी कराते हैं।
लोड न ले पाने के बावजूद डीजल खपत लाखों में
कादरचौक में 25 केेवीए का जनरेटर काफी समय से लगा हुआ है। स्टाफ के मुताबिक, यह जनरेटर ढाई साल से बंद पड़ा है। यहां पर दूसरा जनरेटर महज पांच केवीए का है जो सही से लोड नहीं ले पाता है। बावजूद इसके एमओआईसी डॉ. अवधेश राठौर का कहना है कि ढाई साल में उन्होंने अपने पास से साढ़े चार लाख रुपये डीजल पर खर्च किए हैं। उनको यह पैसा भी नहीं मिल पा रहा है। पैसा दिलाने की मांग उच्चाधिकारियों से कई बार कर चुके हैं। डीजल के लिए उनको कोई बजट नहीं दिया जा रहा है।
डीजल के बजट का अभाव है। सभी सीएचसी-पीएचसी पर जरूरत पड़ने पर जनरेटर चलाया जाता है, उसका खर्च अन्य मद से पूरा किया जाता है। फिलहाल सभी जगह इन्वर्टर लगे हैं, इसलिए जनरेटर चलाने की आवश्यकता ज्यादा नहीं पड़ती है। इमरजेंसी में जनरेटर चलाए जाते हैं।
– डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ

03बीडीएन23आर- कादरचौक सीएचसी पर बंद पड़ा जनरेटर।संवाद

03बीडीएन23आर- कादरचौक सीएचसी पर बंद पड़ा जनरेटर।संवाद

03बीडीएन23आर- कादरचौक सीएचसी पर बंद पड़ा जनरेटर।संवाद


