Budaun News: चार घोड़ों में मिले ग्लैंडर्स फारसी बीमारी के लक्षण
बदायूं। जिले में एक बार फिर चार घोड़ों में ग्लैंडर्स फारसी नामक बीमारी के लक्षण पाए गए हैं। विभागीय अधिकारियों ने दोबारा सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। दूसरी जांच रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद में बीमारी से ग्रसित घोड़ों के मार दिया जाएगा।
जिले में करीब सात साल पहले भी चार घोड़ों में ग्लैंडर्स फारसी बीमारी के लक्षण मिले थे। हिसार लैब में उनके सैंपल की जांच कराई गई थी। दोबारा सैंपल भेजकर जांच कराई गई थी। पुष्टि होने के बाद में उन घोड़ों को मार दिया गया था। अब एक बार फिर से चार घोड़ों में ग्लैंडर्स फारसी बीमारी के लक्षण दिखे हैं।
इनमें दो घोड़े उझानी और दो बिसौली क्षेत्र के हैं। पशुपालन विभाग की ओर से करीब 20 दिन पहले इनके सैंपल जांच के लिए भेजे थे। पुष्टि के लिए अब दोबारा सैंपल भेजे गए हैं। यदि लैब से बीमारी की पुष्टि होती है तो संबंधित घोंड़ों को मार दिया जाएगा। सीवीओ एनएस मलिक ने बताया कि दोबारा जांच की पुष्टि होने के बाद में अगला कदम उठाया जाएगा।
मारने के अलावा कोई उपचार नहीं
यह बीमारी घोड़ों में बरखोलडेरिया मैलियाई नामक जीवाणु से फैलती है। संक्रमित पशु से यह अन्य पशुओं और मनुष्यों में भी फैल सकती है। जिन अश्व प्रजातियों में ग्लैंडर्स फारसी के लक्षण मिलते हैं, ऐसे पशु को मारकर दफनाने के अलावा कोई उपचार नहीं है। जिले में वर्ष 2016 में दातागंज क्षेत्र में चार घोड़ों के साथ ऐसा हो चुका है, जिन्हें मार दिया गया था।
ग्लैंडर्स के लक्षण
पशु के शरीर में गांठें बनना, नाक और आंखों से पानी गिरना, शरीर पर फफोले बन जाना, प्राथमिक पहचान है। पशु का सीरम का सौंपल लेकर जांच के लिए हिसार भेजा जाता है। वहीं से इस रोग की पुष्टि होती है।