Budaun News: सुरक्षित सफर पर भारी पड़ रही बालू लदे ओवरलोड वाहनों की दौड़

बालू से ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉला। संवाद
उझानी। बरेली-मथुरा हाईवे पर पिछले कई दिनों से बालू के ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलों और डंपरों की आवाजाही बढ़ गई है। रोजाना तड़के पांच बजे से दोपहर तक दर्जनों की संख्या में ओवरलोड वाहन कछला और उझानी के रास्ते बदायूं, बिल्सी और बिसौली की ओर जाते हैं। आवेरलोड वाहनों के चालकों में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ किसी भी दिन बड़े हादसे की वजह बन सकती है, लेकिन अफसरों की नजर इन पर नहीं पड़ती।
बालू से ओवरलोड वाहन पड़ोसी जिला कासगंज में मनकापुर तो दूसरी ओर कादरचौक के रास्ते उसहैत क्षेत्र से निकलते हैं। कछला में बालू खनन का कोई प्वाइंट नहीं है। इसके बाद भी खजुरारा और चंदनपुर- पिपरौल की तरफ से बालू लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां निकलती हैं। करीब 100 क्विंटल क्षमता के ट्रैक्टर-ट्रॉलों में डेढ़ सौ क्विंटल से अधिक बालू लोड कर ली जाती है। बरेली-मथुरा हाईवे पर यात्री और छोटे वाहनों की आवाजाही भी बहुत है। ऐसे में बालू लदे ओवरलोड वाहनों में ट्रैक्टर-टॉला और डंपर किसी भी दिन बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं।
सबसे ज्यादा दिक्कत ओवरलोड वाहन चालकों में एक-दूसरे से आगे निकल जाने की होड़ को लेकर बताई जा रही है। मंगलवार सुबह ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉला की रफ्तार के चश्मदीद हरीओम ने बताया कि अनियंंत्रित होकर ट्रैक्टर-ट्रॉला किसी छोटे वाहन पर पलट जाए तो छोटे वाहन सवारों को जान बचाना भी मुश्किल हो जाएगा। बता दें कि पिछले दिनों कछला के पास ओवरलोड ट्रॉला पहिया पंक्चर हो जाने के बाद सड़क किनारे पलट गया था। ट्रैक्टर मालिक ने रात में ही जेसीबी के जरिये बालू दूसरे ट्रॉला में लोड करा दिया। इसके बाद भी किसी ने हकीकत पर गौर नहीं किया।
स्पीड ब्रेकर या मामूली चढ़ाई पर उठ जाते हैं ट्रैक्टर के अगले पहिए
क्षमता से अधिक लोड होने के कारण ट्रैक्टर-ट्राला जब रेलवे क्रॉसिंग और स्पीड ब्रेकर से होकर गुजरते हैं तो ट्रैक्टर के अगले दोनों पहिए ऊपर उठ जाते हैं। यही हाल चढ़ाई पर चढ़ने के दौरान होता है। दोनों पहिए ऊपर उठ जाने पर स्टेयरिंग का ट्रैक्टर पर से नियंत्रण खत्म हो जाता है। ऐसे में अचानक कोई वाहन सामने आ जाए तो ट्रैक्टर-ट्रॉला को बचाना मुश्किल हो जाता है।