Budaun News: दो दर्जन गांव टापू बने, जिला मुख्यालय से टूटा संपर्क

हजरतपुर से लालपुर खादर के बीच सड़क पर भरे पानी में चलती नांव। संवाद
चार गांवों के अंदर घुसा बाढ़ का पानी, लोग परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
दातागंज। रामगंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। करीब दो दर्जन गांव ऐसे हैं, जिनका दातागंज और शाहजहांपुर की ओर से जाने वाले रोड पर पानी भरने के कारण मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। यह गांव टापू बन गए हैं। इसके साथ ही चार गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
जिले के दातागंज तहसील क्षेत्र से होकर निकल रही रामगंगा ने अब तबाही मचाना शुरू कर दी है। दातागंज क्षेत्र के जलेबी नगला, उदैईया नगला, हर्रामपुर, नवादा, पट्टी बिजा, लालपुर खादर, कुंडरा मजरा, जरतौली समेत दो दर्जन गांवों का संपर्क पूरी तरह से जिले की दातागंज तहसील और शाहजहांपुर से टूट गया है।
दातागंज के सखतपुर, सिमरिया, मौसमपुर, अखत में बाढ़ का पानी गांव की गलियों में घुस गया है। ऐसे में ग्रामीण परेशान हैं। शाम को एसडीएम दातागंज धर्मेंद्र सिंह ने हजरतपुर पुल के पास पहुंचकर बाढ़ का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि बैराजों से अब कम पानी छोड़ जा रहा है। जल्द ही पानी कम होने लगेगा, कोई परेशान न हो, प्रशासन भरपूर मदद करेगा।
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पांच किलोमीटर करना पड़ रहा नाव से सफर
रामगंगा में बाढ़ का पानी बढ़ने से खेतों से लेकर सड़कों तक पानी भर गया है, जिसकी वजह से लालपुर खादर, मौसमपुर, हर्रामपुर, शेरपुर के ग्रामीणों को हजरतपुर पहुंचकर खाने-पीने और दवाएं लेने के लिए को पांच किलोमीटर तक नाव से आना-जाना पड़ रहा है।
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मौसमपुर गोआश्रय स्थल में भरा पानी
मौसमपुर में बनी गोआश्रय स्थल में 50 गोवंश है। खेतों में पानी भरने के साथ गांव में भी पानी भरने लगा है। वहीं गांव के बाहर स्थित गोआश्रय स्थल में दो फुट पानी भर गया है।
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दो सरकारी विद्यालय बाढ़ की भेंट चढ़े, बच्चों की पढ़ाई चौपट
बदायूं। जिले में करीब दो माह तक गंगा खतरे के निशान से ऊपर बहती रही, जिसकी वजह से कई गांवों में पानी भर गया था, साथ ही कुछ स्कूल बाढ़ की भेंट चढ़ गए। बाढ़ का पानी कम होने पर अब स्थिति सामान्य हुई तो बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को पड़ोस के गांवों में पढ़ाने के लिए भेज दिया, लेकिन उन गांव के बेहद कम ही बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं।
सहसवान के गांव तौफी नगला में कई दिनों तक बाढ़ का पानी भरा रहा। साथ ही सरकारी विद्यालय समेत कई घर बाढ़ की भेंट चढ़ गए। ऐसे में काफी समय तक आवागमन पूरी तरह से ठप रहा। इसकी वजह से गांव वालों को प्रशासन ने औरंगाबाद के सरकारी स्कूल में रहने के लिए दे जगह देदी।
स्थिति ठीक होने पर लोग अपने-अपने गांव लौट गए, लेकिन स्कूल बाढ़ की भेंट चढ़ जाने की वजह से शिक्षकों को औरंगाबाद में अटैच कर दिया। स्थिति ठीक होने पर कुछ छात्र-छात्राओं ने पढ़ने के लिए स्कूल पहुंचना शुरू कर दिया, पर अधिकतर स्कूल नहीं आ रहे।
इंचार्ज प्रधानाध्यापक नारनसिंह ने बताया कि उनके यहां 52 बच्चे पंजीकृत है। उनमें से 20 से 25 बच्चे ही स्कूल आ रहे है। यहीं हाल उसहैत के गांव बेहटी का है। यहां का विद्यालय भी बाढ़ की भेंट चढ़ गया। यहां पर 42 बच्चे पंजीकृत थे। विद्यालय में दो शिक्षक तैनात थे, जिसमें विचित्र और सोनू ठाकुर है। इनको पास के गांव ललोमई के सरकारी स्कूल अटैच कर दिया गया है। बेहटी विद्यालय के पंजीकृत 15 से 20 बच्चे ही स्कूल पहुंच पा रहे हैं।
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गांव में बना स्कूल बाढ़ में समा गया, साथ ही गांव जाने वाले रास्ता भी बाढ़ के दौरान कट गया। इसकी वजह से अब भी लोग गांव नहीं जा रहे हैं। अभी हम लोगाें के पास रहने का ठिकाना नहीं है। ऐसे में बच्चों को दूर स्कूल नहीं भेज रहे हैं।
-रामसेवक, तौफी नगला, सहसवान
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गांव में जो प्राथमिक स्कूल बना था, वह बाढ़ में समा गया। ऐसे में अब यहां के शिक्षकों को ललोमई स्कूल भेज दिया गया, लेकिन यहां से वहां तक छोटे बच्चे को भेजना सही नहीं है। अभी मौसम ठीक नहीं है, बुखार का प्रकोप बहुत चल रहा है।
-सतेंद्र, अहमद नगर बछौरा
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जिले में बाढ़ की वजह से इस बार जो विद्यालय प्रभावित हुए है, उनको दूसरी जगहों पर स्थापित करने की तैयारी की जाएगी, ताकि आने वाले दिनों में बच्चों को पढ़ाई के दौरान कोई परेशानी न हो।
-स्वाति भारती, बीएसए

हजरतपुर से लालपुर खादर के बीच सड़क पर भरे पानी में चलती नांव। संवाद

हजरतपुर से लालपुर खादर के बीच सड़क पर भरे पानी में चलती नांव। संवाद

हजरतपुर से लालपुर खादर के बीच सड़क पर भरे पानी में चलती नांव। संवाद