Budaun News: भ्रांतियों की भेंट चढ़ा पुरुष नसबंदी पखवाड़ा
बदायूं। 21 नवंबर से शुरू किया गया पुरुष नसबंदी पखवाड़ा भ्रांतियों की भेंट चढ़ गया है। पूरे पखवाड़े में एक भी पुरुष नसबंदी ऑपरेशन कराने अस्पताल नहीं आया। सोमवार को पखवाड़े का अंतिम दिन है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को मिले लक्ष्य में एक फीसदी भी सफलता नहीं मिली। विभाग के तमाम प्रचार-प्रसार के बावजूद लोगों को इसके प्रति जागरूकता नहीं आई।
नवंबर माह में जिलेभर में 322 महिलाओं ने नसबंदी कराई, लेकिन पुरुष नसबंदी के लिए पखवाड़ा चलाने के बावजूद एक भी आदमी नसबंदी कराने आगे नहीं आया। साल में 100 पुरुष नसबंदी ऑपरेशन का लक्ष्य रहता है। पखवाड़े में भी स्वास्थ्य विभाग को 50 का लक्ष्य दिया गया, लेकिन इसमें कोई सफलता नहीं मिली।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हर वर्ष पुरुष नसबंदी को लेकर न केवल लक्ष्य तय किया जाता है, बल्कि शिविर और पूरे अमले की ताकत भी झोंक दी जाती है, लेकिन विभाग की कोशिश नाकाम हो जाती है। कहीं न कहीं अभियान का सही से प्रचार-प्रसार न होना भी इसका अहम कारण माना जा रहा है।
लक्ष्य घटा, फिर भी पूरा नहीं
नसबंदी ऑपरेशन के लक्ष्य को 2012 के बाद घटा दिया गया था। पहले यह लक्ष्य 500 का होता था। उसके बाद 100 कर दिया गया, फिर भी स्वास्थ्य विभाग लक्ष्य के मुताबिक नसबंदी ऑपरेशन नहीं कर पा रहा है।
प्रोत्साहन सबसे ज्यादा, फिर भी लक्ष्य न हुआ पूरा
नसबंदी कराने के लिए पुरुषों को सरकार की ओर से 3000 रुपये दिए जाते हैं, वहीं महिलाओं को यह प्रोत्साहन राशि 2000 रुपये दी जाती है। महिलाओं से ज्यादा राशि पुरुषों को मिलने के बाद भी पुरुष नसबंदी कराने मेें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
मिथक जो पुुरुषों को करते हैं पीछे
नसबंदी में पुरुषों के फिसड्डी रहने के पीछे कुछ मिथक हैं। ज्यादातर पुरुष सोचते हैं कि नसबंदी करवाने से उनकी मर्दाना शक्ति घट जाएगी, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। अधिकांश पुरुष नसबंदी कराने में शर्म महसूस भी करते हैं, जबकि महिलाओं की अपेक्षा पुरुष नसबंदी बहुत आसान है। डॉ. अब्दुल सलाम के मुताबिक पुरुष नसबंदी का ऑपरेशन आसान है। इसमें अस्पताल में भर्ती होने की भी जरूरत नहीं पड़ती। ऑपरेशन के बाद पुरुष घर खुद जाने की हालत में रहता है। पुरुष नसबंदी गर्भ रोकने का एक स्थायी तरीका भी है।
वर्जन
पुरुष नसबंदी लक्ष्य की पूर्ति के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। बावजूद इसके नसबंदी को लेकर पुरुषों में कई तरह की भ्रांतियों के चलते वे नसबंदी के लिए आगे नहीं आते। फिर भी हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि सोमवार को नसबंदी कैंप लगाकर अधिक से अधिक पुरुष नसबंदी करा सकें। पखवाड़े में एक भी पुरुष नसबंदी को आगे नहीं आया है। डाॅ. अब्दुल सलाम, नोडल अधिकारी, नसबंदी विभाग