बदायूं

Budaun News: सहसवान और उसहैत में घरों तक पहुंचा पानी, निकलना दुश्वार

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बृहस्पतिवार के मुकाबले शुक्रवार को और बढ़ गया गंगा का जलस्तर,

संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर बृहस्पतिवार के मुकाबले .78 मीटर बढ़ गया। बृहस्पतिवार को गंगा का गेज जहां 162.67 मीटर नापा गया था, वहीं शुक्रवार को यह बढ़कर 162.78 मीटरगेज पहुंच गया। गंगा अब खतरे के निशान से 0.78 मीटर ऊपर बह रही है। इधर सहसवान, उसहैत के बाढ़ से प्रभावित गांवों में पानी घरों तक आ पहुंच है, जिससे लोगों का निकलना तक दुश्वार हो गया है।

बृहस्पतिवार को नरौरा से 202578 क्यूसेक, बिजनौर से 178419 क्यूसेक तथा हरिद्वार से 70778 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। ऐसे में गंगा किनारे बसे गांवों के लोग खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। इसके अलावा सहसवान, उसहैत, उसावां आदि क्षेत्रों में बाढ़ का पानी में गांव तथा खेतों में भर गया है। इससे किसान परेशान हैं।

शुक्रवार को भी सहसवान क्षेत्र के गांव वीरसहाय नगला, परशुराम नगला, खागी नगला, भमरोलिया में पानी ग्रामीणों के घर में घुस आया। पानी के कारण उनका घरों से निकलना तक बंद हो गया। खासकर महिलाओं और बच्चों को खासी परेशानी उठानी पड़ी। बाढ़ के कारण इन चार गांवों के क़रीब दो से ढाई हजार लोग प्रभावित हैं।

उसहैत में बेहटी गांव में कटान कर रही गंगा

उसहैत। क्षेत्र के कई गांवों में गंगा के कटान करने से उसका पानी भर गया है। गांव बेहटी में गंगा कटान करने लगी है। गांव से भकरी जाने वाला रोड लगातार कट रहा है। भकरी गांव के लोग करीब तीन साल पहले करीब दो किमी दूर बसे घासनगला गांव जाकर बस गए थे। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जिनके घर गंगा के किनारे हैं।

फूस की बनी झोंपड़ियों में रह रहे लोग पानी और दलदल के कारण परेशान हैं। पानी के साथ आने वाले सांप और अन्य कई कीड़े भी उनकी परेशानी का कारण बन रहे हैं। इसके अलावा कमलेनगला, बसौरा, जटा आदि गांवों में बिल्कुल किनारों पर पानी चल रहा है। गंगा का कटान भी यहां तेजी से हो रहा है। संवाद

हजरतपुर पुल के पहुंच मार्ग की बाउंड्री ध्वस्त, सहसवान में लगाई नाव

नगरिया खनू से कुड़रा मजरा मार्ग पर स्थित है पुल, रोड पर भी कई जगह भरा पानी

दातागंज। लगातार बारिश के कारण बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हाल दिन-ब-दिन खराब होता जा रहा है। शुक्रवार को नगरिया खनू से कुड़रा मजरा जाने वाले रोड पर स्थित हजरतपुर पुल के पहुंच मार्ग की बाउंड्री ध्वस्त हो गई। पहुंच मार्ग पर भी पानी भर जाने के कारण लोगों का इधर से निकलना बंद हो गया है। पूरे रोड पर कहीं पानी तो कहीं कीचड़ फैलने से अब केवल ट्रैक्टर-ट्राॅली ही सहारा बचा है।

तहसील क्षेत्र मे नगरिया खनू से होकर कुड़रा मजरा, गढि़या रंगीन जाने वाले रोड पर पिछले साल ही करीब 47 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण कराया गया था। बारिश के चलते पुल का कुड़रा मजरा जाने वाले वाले पहुंच मार्ग की बाउंड्री शुक्रवार को ध्वस्त हो गई। इससे मार्ग पर आवागमन ठप हो गया।

हालांकि जेसीबी लगाकर बाउंड्री की मिट्टी को लेवल में करने का प्रयास किया गया लेकिन यह सफल नहीं हो सका। इधर पूरे रोड पर कई जगहों पर पानी भर गया है, जिससे लोगों को आने- जाने में परेशानी हो रही है। रोड पर कई जगह पड़ी मिट्टी ने कीचड़ का रूप ले लिया है। संवाद

गांव वालों ने लगाए ट्रैक्टर, 150 रुपये प्रति सवारी रेट

दातागंज के आसपास के गांवों के लोग अपने कामों से इस रोड पर शाहजहांपुर के कई गांवों में आते-जाते हैं। बाउंड्री ध्वस्त होने और मार्ग पर पानी भरा होने के कारण कुछ गांव वालों ने अपने ट्रैक्टर इस काम के लिए लगा दिए हैं। 150 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से एक तरफ का किराया वसूल रहे हैं। मजबूरी में ग्रामीणों को पैसे देने पड़ रहे हैं।

कई गांवों की तरफ बढ़ रहा पानी, प्रशासन ने लगवाई सात नाव

सहसवान। सहसवान में जहां चार गांवों में पानी भर गया है वहीं कई गांव में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे आबादी की ओर बढ़ रहा है। गांव औरंगाबाद टप्पा जामनी ग्राम पंचायत के मजरा तौफी नगला में भी बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन द्वारा बाढ़ के पानी से प्रभावित चारों मजरों के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए सात नाव लगाई गईं हैं जो पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का कार्य कर रही हैं।

शुक्रवार को तहसीलदार शर्मनानंद ने पूर्ति निरीक्षक प्रदीप यादव तथा राजस्व कर्मचारियों के साथ बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया तथा राहत चौपाल शिविर लगाकर लोगों को बाढ़ के प्रति सावधानी बरतने तथा स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जानकारी दी।

बताया कि ग्राम टोटपुर करसरी धापड़, औरंगाबाद टप्पा जामनी तथा मालपुर ततेरा ग्राम में बाढ़ चौकियां स्थापित की गईं हैं। इन पर राजस्व कर्मचारियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है। कई स्थानों पर राहत कैंप भी बनाए गए हैं। इसके अलावा पूर्ति विभाग द्वारा खाद्य सामग्री का भी वितरण गांवों में कराया जा रहा है।

खेतों में भरा पानी, पशुओं के चारे का भी संकट

बाढ़ से पूरा गांव अस्त-व्यस्त हो गया है। लोगों को रहने के ठिकाना नहीं मिल रहा है। हालांकि प्रशासन ने कुछ व्यवस्था की है परंतु ऐसे गुज़रबसर करने में ग्रामीणों को काफी समस्या हो रही है।

– छोटू, परशुराम नगला

गंगा का जलस्तर बढ़ने से खेतों की फसल नष्ट होती दिख रही है। यह चिंता का विषय है। अगर ऐसे ही जलस्तर बढ़ता रहा तो पशुओं के लिए चारे का संकट भी पैदा हो जाएगा।

– तिलक सिंह, तौफी नगला

गांव में काफी पानी आ गया है। खेत पानी की चपेट में आने से उन्हें काफ़ी नुक़सान हुआ है। सारी फसल ख़राब हो गई है। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था नही हो पा रही है।

– मुनेंद्र, टोटपुर करसरी

गांव में पूरी तरह पानी भर गया है, जिससे आने-जाने और बाहर से सामान लाने में परेशानी हो रही है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं और बच्चों को है। हर बार बाढ़ आने पर नाव से लोग काम चलाते थे, लेकिन इस बार यह भी नहीं है।

– वीरेंद्र, वीरसहाय नगला

सहसवान में इस तरह सड़क पार कर रहे लोग।

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