Budaun News: महिला अस्पताल के इलाज से डराया… नर्सिंग होम पहुंचाकर कमीशन पाया

महिला अस्पताल। संवाद
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में प्राइवेट अस्पतालों के दलाल हावी हैं। वे मरीजों को बरगलाकर निजी अस्पतालों में भर्ती करा रहे हैं और मोटा कमीशन ले रहे हैं। दलाल मरीजों और उनके तीमारदारों के सामने सरकारी अस्पताल में बदइंतजामी और लापरवाही का ऐसा हौव्वा खड़ा करते हैं कि वे आसानी से उनके झांसे में आ जाते हैं। दलाल चार दिनों दो गर्भवतियों का प्राइवेट नर्सिंग ले जाकर प्रसव करा चुके हैं।
बुधवार को कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव इस्माइलपुर की मीना को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन महिला अस्पताल लेकर आए थे। यहां दो महिला और दो पुरुष दलालों ने उन्हें घेर लिया। कहा, यहां प्रसव कराने पर जच्चा-बच्चा दोनों के लिए रिस्क रहेगा। डॉक्टर से लेकर स्टाफ तक सब लापरवाह हैं। मरीज चीखता-चिल्लाता रहता है, कोई देखने-सुनने वाला नहीं है। वे सिर्फ 15 हजार रुपये में प्राइवेट अस्पताल में प्रसव करा देंगे।
दलालों ने मीना और उनके परिजनों को इस कदर डरा दिया कि वे प्राइवेट अस्पताल में प्रसव कराने के लिए राजी हो गए। विभागीय अधिकारियों तक यह मामला पहुंचा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। रविवार को बिसौली थाना क्षेत्र के गांव मिठामई की रेनू के साथ भी यही हुआ। उनके परिजनों को महिला अस्पताल के सिस्टम से इतना डराया गया कि उन्होंने दलालों की बात मान ली और निजी अस्पताल में जाकर प्रसव कराया।
एक केस पर मिलता है पांच से 10 हजार कमीशन
शहरी क्षेत्र में दलालों के भरोसे संचालित इस तरह के एक दर्जन से अधिक निजी अस्पताल हैं। महिला अस्पताल से गर्भवती को प्रसव के लिए निजी अस्पताल लाने पर दलाल को पांच से 10 हजार रुपये तक मिलते हैं। निजी अस्पतालों में सामान्य प्रसव के 15 से 20 हजार रुपये लिए जाते हैं। वार्ड का चार्ज और दवाओं का खर्च अलग से लिया जाता है। ऑपरेशन से प्रसव के 40 से 50 हजार रुपये वसूले जाते हैं।
इन परिस्थितियों में किया जाता है रेफर
जिला महिला चिकित्सालय में पहुंचने वाली गर्भवतियों को भर्ती करने से पहले चिकित्सक या वहां मौजूद स्टाफ उनकी स्वास्थ्य संबंधी प्रोफाइल चेक करते हैं। यदि जांच में हीमोग्लोबीन का स्तर आठ या उससे कम पाया जाता है तो हालत गंभीर बताकर हायर सेंटर ले जाने की सलाह दे दी जाती है। इसके अलावा भी मरीज को भर्ती न करने के तमाम बहाने बना दिए जाते हैं, जबकि प्राइवेट अस्पताल में इन तमाम कारणों को दरकिनार कर प्रसव करा दिया जाता है।
महिला अस्पताल के दो किलोमीटर के दायरे में ही हैं एक दर्ज नर्सिंग होम
महिला अस्पताल के दो किलोमीटर के दायरे में ही लालापुल, डीएम रोड, अलापुर रोड, शेखूपुर रोड, कचहरी रोड, बरेली रोड पर एक दर्जन से अधिक निजी अस्पताल हैं। सभी के दलाल महिला अस्पताल में सक्रिय रहते हैं। निजी अस्पताल ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था भी दलाल ही करा देते हैं।
महिला अस्पताल में दलालों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंध है। हाल में जो शिकयतें मिली हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। दलालों को संरक्षण देने वालों को भी चिह्नित किया जा रहा है। दलालों के साथ ही उन्हें संरक्षण देने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। – डॉ. इंदुकांत, सीएमएस जिला महिला अस्पताल