पीलीभीत

Pilibhit News: गर्मी में डायरिया के मरीज बढ़े, लापरवाही पड़ सकती है भारी

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Diarrhea patients increase in summer, negligence can be heavy

जिला अस्पताल में दवा काउंटर के बाहर लगी भीड़। संवाद

चिकित्सकों ने दी सावधानी बरतने की सलाह, बचाव के उपाय भी बताए

संवाद न्यूज एजेंसी

पीलीभीत। गर्मी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तापमान बढ़ने के साथ गर्म हवा चलने से डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) की समस्या बढ़ रही है। खासकर बच्चों पर सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस समय जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी में 40 प्रतिशत से ज्यादा मरीज उल्टी-दस्त यानी डायरिया के आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि सावधानी बीमारी से बचाव का सबसे बढ़ा इलाज है।

पिछले चार दिनों से गर्मी के साथ गर्म हवा भी चल रही है। बढ़ती गर्मी का लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ रहा है। खासतौर से बच्चों पर मौसम का ज्यादा प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी है।

जिला अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इसमें से 40 प्रतिशत मरीज डायरिया की समस्या से पीड़ित हैं। उल्टी, दस्त और वायरल बुखार के मामले ज्यादा है। मंगलवार को जिला अस्पताल में 1080 मरीज ओपीडी में पहुंचे।

बाल रोग विशेषज्ञ शरद गुप्ता ने बताया कि इस मौसम में बच्चों में डायरिया सबसे ज्यादा होता है। इसके साथ ही वायरल बुखार, जुकाम व खांसी का प्रभाव भी रहता है। उन्होंने कहा कि डायरिया होने पर बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाते रहें और गर्मी से बचाव के तरीके अपनाएं। खुले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें। जरूरत पड़े तो चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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साफ पानी का करें सेवन

जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ मनीष ने बताया कि सावधानी बरतने से ही मौसमी बीमारी से बचा जा सकता है। मौजूदा समय में दिन प्रतिदिन तापमान में वृद्धि हो रही है। इसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में साफ-सफाई के साथ खान-पान पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। जरूरी है कि स्वच्छ पानी का सेवन अधिक किया जाए।

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डिहाइड्रेशन के लक्षण

– तेज सिरदर्द होना

– त्वचा सूखी होना

– ज्यादा देर तक पेशाब न आना

– पेशाब पीले रंग का आना

– चक्कर आना, घबराहट महसूस होना

– मुंह सूखना, सुस्ती और थकान होना

– कमजोरी महसूस होना।

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बचाव

– सिर पर कैप पहनें या कपड़ा रखें

– पानी और तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें

– मौसमी फल तरबूज, खरबूजा, ककड़ी का सेवन करें

– काम करते समय पानी की बोतल साथ रखें

– दही और लस्सी का सेवन करें

– पानी में नमक डालकर पीएं

– डायरिया होने पर बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाएं

– चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।


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