Pilibhit News: मांग घटने से सिसक रहे बांसुरी के सुर
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Mon, 18 Sep 2023 12:28 AM IST

बांसुरी बनाने के लिए रखा कच्चा माल । संवाद
पीलीभीत। शहर में करीब 200 लोग बांसुरी बनाने के काम से जुडे हुए हैं। इसके अलावा उनके पास अन्य कोई काम नहीं है। बांसुरी की मांग मौजूदा समय में घटने के कारण असम से बांस की मांग भी कम हो गई है। हालत यह है कि कारीगरों के यहां कच्चा माल खराब होने लगा है। ऐसे में बांस की खपत भी न के बराबर रह गई है।
देश और प्रदेश में अपनी पहचान बन चुकी पीलीभीत की बांसुरी का धंधा जिले में बांस का उत्पादन न होने से कम पड़ता जा रहा है। वहीं मांग में कमी होने के कारण इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को आर्थिक समस्या भी घेरने लगे हैं। बांसुरी के लिए असम से बांस मंगवाया जाता है। भाड़ा ही काफी हो जाता है। एक दशक पहले तक बांसुरी की मांग ठीक ठाक होने पर महीने में दो तीन ट्रक आ जाते थे। अब बांसुरी की मांग ही घट गई है। इसलिए असम से बांस की मांग भी बहुत कम हो गई है। असम से जिले में बांसुरी स्वरूप के छोटे पीस आते हैं। इन्हीं पीस से बांसुरी तैयार होती है। पहले मांग अधिक होने के कारण 5000 बांस के पीस महीने में आते थे, अब इसकी संख्या घटकर 1000 ही रह गई है।
जिले में बांस की खेती हो तो फले बांसुरी उद्योग
नवी एंड संस की हिना का कहना है कि बांसुरी बनाने का काम दिनों दिन कम होता जा रहा है। वजह यह है कि यहां बांस का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। कच्चा माल महंगे दामों पर असम से मंगवाया जाता है। बांस का एक ट्रक का भाड़ा करीब 50 हजार रुपये आता है। जिस कारण इसे बनाने में महंगाई का सामना करना पड़ता है। कारीगरों का कहना है कि अगर जिले में बांस की खेती हो तो बांसुरी उद्योग का पंख लग सकते हैं।