पीलीभीत

Pilibhit News: जेहन से उतरे झाड़-फूंक का जहर, तभी बचेगी जान

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पीलीभीत। वर्षाकाल में चूहे के बिलों और चींटियों की बांबी में पानी भर जाने से सांप बाहर निकल आते हैं। सांप कभी अपना बिल या बांबी नहीं बनाता है बल्कि चूहे के बिलों या चींटियों की बांबी में ही रहता है, ताकि भोजन मिलता रहे। बारिश का मौसम शुरू होते ही सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। लोग झाड़-फूंक में वक्त बर्बाद कर जीवन संकट में डाल लेते हैैं।

सर्पदंश का एकमात्र इलाज स्नेक एंटी वेनम इंजेक्शन है। यह जिला अस्पताल के अलावा सभी सीएचसी और पीएचसी पर उपलब्ध होता है और मुफ्त लगाया जाता हैै। अगर समय रहते संर्पदंश पीड़ित को इंजेक्शन लग जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है, लेकिन लोग जागरूकता के अभाव में तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक करने वालों के चक्कर में फंस जाते हैं और जान गंवा देते हैं।

जिले में प्रत्येक वर्ष सर्पदंश से मौतों के मामले सामने आ रहे हैं। सरकारी आंकडों की मानें तो वर्ष 2021 में 37 लोग सर्पदंश का शिकार हुए थे। 2022 में 106 लोगों को सांप ने डसा था। इनमें से दो लोगों की मौत हो गई थी। वर्ष 2023 में जून तक 39 लोगों को सांप डस चुके हैं। इनमें से दो लोगों की मौत हो चुकी है।

ये वे आंकड़े हैं जो लोग सर्पदंश के बाद सरकारी अस्पतालों में पहुंचे, जबकि वास्तविक संख्या इसके कहीं ज्यादा है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि सांप के डसने पर तुरंत मरीज को अस्पताल लेकर जाएं। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में स्नेक एंटी वेनम इंजेक्शन उपलब्ध हैं।

केस एक

सोमवार को गांव खमरिया पंडरी निवासी छत्रपाल की पत्नी सुशीला देवी अपने घर मेें काम कर रही थीं, तभी सांप ने उन्हें डस लिया। परिजनों ने पहले झाड़ फूंक कराई। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल लेकर आए। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

केस दो

शुक्रवार को थाना दियोरिया क्षेत्र के गांव जगतपुर निवासी मिश्री लाल के पुत्र हरिराम खेत पर काम कर रहे थे, तभी सांप ने डस लिया। परिजन पहले तो झाड़-फूंक कराते रहे, सुधार न होने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

केस तीन-

ग्राम निसावां निसैया निवासी केदार सिंह की पत्नी सुनीता देवी को 27 जुलाई को सांप ने डस लिया था। परिवार वाले इधर-उधर झाड़-फूंक वालों से इलाज कराते रहे। सीएचसी तब लेकर पहुंचे जब वह अंतिम सांसें ले रहीं थीं। इलाज के दौरान उनकी की मृत्यु हो गई।

केस चार-

माधोटांडा के महाराजपुर गांव की सुनीता एक अगस्त को घर में जमीन पर सो रही थीं। इसी दौरान उन्हें सांप ने डस लिया। परिजन पहले झाड़ फूंक में लगे रहे। बाद में जब अस्पताल लेकर पहुंचे तब तक सुनीता की सांसें थम चुकी थीं।

सर्पदंश के लक्ष्ण

-काटने वाली जगह पर सूजन आ जाना।

-रक्त स्राव होना।

-हृदय गति का धीमा होना।

-रक्तचाप कम हो जाना।

– शरीर और पेट में दर्द होना।

ये बरतें सावधानियां

– खेतों पर नंगे पांव न जाएं।

– हाथ में डंडा रखें, उससे जमीन पर ठक-ठक करते चलें।

– घरों के आसपास सफाई रखें। कबाड़ इकट्ठा न करें।

– घरों में चूहे के बिलों को बंद कर दें। पानी निकास के स्थान पर पतली जाली लगवाएं।

– अंधेरे में कहीं न जाएं। टार्च या मोबाइल फोन की लाइट का प्रयोग करें।

लोग झाड़-फूंक के चक्कर में जान गंवा रहे हैं। सांप के काटने के बाद तत्काल मरीज को अस्पताल लेकर आएं। समय रहते स्नेक एंटी वेनम इंजेक्शन लगने से मरीज की जान बच सकती है। – डॉ. रमाकांत सागर, फिजिशियन, जिला अस्पताल


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