पीलीभीत

Pilibhit News: तेंदुओं को भाया पीटीआर का माहौल, बढ़ रही संख्या

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पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का जंगल न केवल बाघों के लिए बल्कि तेंदुओं के लिए भी भा रहा है। इससे जंगल में तेंदुओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वर्ष 2022 में आई रिपोर्ट के अनुसार तीन साल के अंतराल में 65 तेंदुए बढ़ गए हैं। वर्तमान में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 101 एक तेंदुए हैं। जंगल में बेहतर ग्रास लैंड, भोजन और पानी की पर्याप्त व्यवस्था तेंदुए की संख्या बढ़ने में मदगार बन रही है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनने के बाद बाघ और तेंदुए समेत वन्यजीवों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा। वर्ष 2014 में पीटीआर बनने के बाद से जंगल में मानव की दखलअंदाजी रोक दी गई। जंगल क्षेत्र में तेंदुओं और बाघ के लिए ग्रास लैंड के साथ जलाशयों को भी विकसित किया गया। हालांकि जंगल और इसके आसपास इलाकों में नदी नहरों का जाल पहले से ही बिछा हुआ है।

बेहतर देखरेख के चलते तेंदुए और अन्य वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ने लगी। टाइगर रिजर्व के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो वर्ष 2019 में पीलीभीत के जंगलों में मात्र 36 तेंदुए थे। इसके बाद 2022 में आई रिपोर्ट में संख्या बढ़कर 101 पहुंच गई। नई रिपोर्ट में 65 बाघों के बढ़ने की बात साफ हुई। अब राष्ट्रीय स्तर पर भी देशभर में तेंदुए के कुनबे बढ़ने के संकेत मिले हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अफसर भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं।

डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में लगातार बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। वन्य विशेषज्ञों की मानें तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व में ग्रास लैंड की स्थिति काफी बेहतर है। पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था है। तेंदुओं व बाघ आदि जानवरों को शिकार आराम से मिल जाता है। इसलिए यहां का जंगल वन्यजीवों के लिए काफी मुफीद है। यही वजह है कि तेंदुओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

72 हजार हेक्टेयर में फैला है जंगल

डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व का जंगल 73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैला हुआ है। यहां तरणभोजी वन्य जीवों की संख्या काफी है। ऐसे में तेंदुए को शिकार के लिए भटकना नहीं पड़ता है। पीटीआर से छोटी बड़ी करीब 12 से ज्यादा नहरें वन क्षेत्र से गुजर रही हैं। इससे पानी की भी कोई समस्या नहीं। जंगल में कई हेक्टेयर का ग्रासलैंड है। तेंदुए व बाघ को यह काफी पसंद है। यही कारण है कि यहां का माहौल तेंदुओं को भा रहा है।


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