Pilibhit News: पीटीआर से देश-दुनिया में मिली पहचान, रोजगार भी बढ़े

चूका बीच में बनी वाटर हट । संवाद
कलीनगर। जंगल की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों की निराली दुनिया से पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) को देश और दुनिया में अलग पहचान मिली। इससे पर्यटन को बेहतर बढ़ावा मिलने लगा। चूका बीच के अलावा सैलानियों के ठहरने के लिए जंगल से बाहर नए होम स्टे विकसित हुए। इससे सैलानियों की सुविधा के साथ लोगों को रोजगार के अवसर भी मिले। पिछले कुछ सालों से औसतन हर पर्यटन सत्र में करीब 20 हजार से ज्यादा सैलानी पीटीआर घूमने आ रहे हैं।
वैसे तो पीलीभीत का जंगल ब्रिटिश काल से अपनी अलग पहचान बनाए रहा है, लेकिन वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद पर्यटन के क्षेत्र में चार चांद लगने लगे। जंगल में बाघ समेत वन्यजीवों की बढ़ती संख्या ने सैलानियों को अधिक आकर्षित किया। वर्ष 2018 में चूका बीच की जिम्मेदारी वन निगम को सौंप दी गई। सुविधाओं में विस्तार कर मोटर वोट की सैर भी शुरू की गई। तीस सफारी वाहनों से जंगल की सैर कर सैलानियों को बाघों के दीदार होने लगे।
सैलानियों की बढ़ती संख्या को देख टाइगर रिजर्व प्रशासन को सफारी वाहनों की संख्या बढ़ानी पड़ी। हर साल सत्र के दौरान बीस हजार से अधिक सैलानी पीटीआर भ्रमण करने आते हैं। पिछले सत्र में 26 हजार सैलानियों की आमद हुई थी। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आए सैलानियों के अलावा विदेशी मेहमान भी शामिल रहे थे।
सैलानियों की आमद ने बढ़ाए रोजगार के अवसर
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पर्यटन सत्र में सैलानियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जंगल के अलावा उससे सटे इलाकों में लोगों ने होमस्टे स्थापित करना शुरू कर दिए। पिछले एक साल में पर्यटन के मार्गों पर दो खूबसूरत होमस्टे विकसित हुए। जहां सैलानियों के रुकने से लेकर आकर्षण के लिए विभिन्न व्यवस्था भी की गई। क्षेत्रीय लोगों को रोजगार भी मिले।
इस सत्र में भी छह विदेशी मेहमानों के अलावा पहुंचे आठ सौ सैलानी
नए पर्यटन सत्र की 15 नवंबर को हुई थी। पर्यटन के द्वार खुलते ही अब तक छह विदेशी मेहमानों के अलावा करीब आठ सौ सैलानियों ने चूका बीच और जंगल की सैर की।
बाइफरकेशन और शारदा डैम भी बनाए हैं अलग पहचान
जनपद में पीलीभीत टाइगर रिजर्व पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, लेकिन कई ऐसे स्थान और भी हैं जो सैलानियों को पसंद आते हैं। इसमें कलीनगर तहसील क्षेत्र में स्थित खूबसूरत बाइफरकेशन और उससे सात किलोमीटर आगे 22 किलोमीटर लंबा शारदा सागर डैम का खूबसूरत नजारा है। बाइफरकेशन में जंगल के बीच नहरों का जाल और खूबसूरत गेस्ट हाउस देख सैलानी काफी खुश होते हैं।
गोमत उद्गम स्थल भी बनी पहचान
पर्यटन सत्र के दौरान पहले सैलानियों की आमद चूका बीच तक सीमित रहती थी, लेकिन अब गोमती उद्गम स्थल के जीर्णोंद्धार के बाद सैलानियों का रुख उद्गम स्थल की ओर भी हो गया। अब यहां रोजाना वाराणसी की तर्ज पर आरती होती है। उद्गम स्थल के निकट गोल्डन होमस्टे भी विकसित हो गया है।

चूका बीच में बनी वाटर हट । संवाद

चूका बीच में बनी वाटर हट । संवाद