Pilibhit News: दून मलाई चावल की मिसब्रांडिंग पर एक लाख रुपये जुर्माना
दो साल पहले निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने लिया था नमूना
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। इंडोनेशिया निर्यात किए जाने वाले सुप्रसिद्ध बासमती चावल ‘दून मलाई’ खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में ब्रांड के अनुरूप नहीं पाया गया। इस पर सुनवाई के बाद एडीएम वित्त की अदालत ने चावल कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
28 जनवरी 2021 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार ने असम रोड स्थित प्रतिष्ठान मैसर्स डीएस एग्री फूड्स का निरीक्षण किया था। टीम ने वहां से विभिन्न किस्मों के चावल का नमूने लिए थे। इसमें ‘दून मलाई’ ब्रांड से निर्यात किए जाने वाले बासमती सेला चावल का पैकेट भी शामिल था। नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे गए। वहां पैकेट पर ब्रांड की अस्पष्ट प्रिंटिंग के साथ बैच नंबर और पैकिंग की तिथि का उल्लेख नहीं था।
लैब की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी न्यायालय में खाद्य सुरक्षा अधिकारी राममिलन राना की आख्या व अभिहीत अधिकारी शशांक त्रिपाठी की स्वीकृति के आधार पर प्रतिपक्षी अमित कुमार अग्रवाल पुत्र राकेश कुमार अग्रवाल निवासी नई बस्ती मधुवन काॅलोनी और उनकी कंपनी डीएस एग्री फूड्स के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया। वहां से मामला इसी साल सुनवाई के लिए एडीएम वित्त राम सिंह गौतम के न्यायालय में भेजा गया। वहां सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से तर्क दिया कि जांच के लिए लिया गया नमूना निर्यात के लिए अस्वीकृत स्टॉक का था। लेकिन वह इस चावल को बाजार में नहीं भेजे जाने की प्रक्रिया को साबित नहीं कर पाए। कोर्ट ने 29 नवंबर 2023 को अमित अग्रवाल व उनकी कंपनी को दोषी करार देते हुए एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
एक महीने में भरना होगा जुर्माना
अमित कुमार अग्रवाल व उनकी कंपनी को एक महीने में जुर्माने की रकम राजकोष में जमा करनी होगी। ऐसा न करने राजस्व वसूली के तहत जुर्माने की रकम वसूली जाएगी।
निर्यात में गाइडलाइन का पालन नहीं
जांच के लिए जिस स्टॉक से नमूना लिया गया वह इंडोनेशिया निर्यात किया जाना था। इसकी पैकिंग निर्यात की गाइड लाइन के अनुरूप नहीं मिली। इस पर कंपनी का लोगो भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं दिख रहा था।
निर्यात नहीं किया जाना था स्टाक
कोर्ट में सुनवाई के दौरान कंपनी के वकीलों ने दलील दी थी कि नमूने के रूप में लिया गया चावल का पैकेट उस ढेर से था जो बैच नंबर और पैकिंग की डेट प्रिंट किए जाने से पहले विदेशी निर्यात से रिजेक्टेड किया गया था।