पीलीभीत

Pilibhit News: साधु-संतों ने ठुकराया विधायक का आग्रह, कहा- पट्टा निरस्त होने पर ही खत्म होगा आंदोलन

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Sadhus and saints rejected the MLA's request, said - the movement will end only after the lease is cancelled.

गांव दियूरिया खुर्द में साधु संतो से वार्ता करते विघायक विवेक वर्मा । स्रोत – विघायक

बिलसंडा। गांव दियूरिया खुर्द में धरने पर बैठे साधु-संतों से रविवार को विधायक विवेक वर्मा ने वार्ता की। आश्वासन दिया कि तालाब का पट्टा निरस्त कराने के लिए वह अधिकारियों से बात करेंगे। विधायक के आंदोलन खत्म करने के आग्रह को साधु संतों ने यह कहकर ठुकरा दिया कि जब तक पट्टा निरस्त नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा। इधर, संत हनुमान दास पट्टा निरस्त न होने पर पांच अक्तूबर को समाधि लेने की जिद पर अड़े हैं।

गांव दियूरिया खुर्द के बाहर संत हनुमान दास कुटिया डालकर रह रहे हैं। वहीं वह पूजा-अर्चना करते हैं। कुटिया के पास ही एक सरोवर है। प्रशासन ने 22 सितंबर 2020 को इस सरोवर का मछली पालन के लिए गांव के प्रेमचंद के नाम पट्टा कर दिया। धरने पर बैठे सत्यगिरि महाराज ने बताया कि पट्टा लेने के बाद भी प्रेमचंद ने सरोवर में मछली पालन शुरू नहीं किया। संत हनुमान दास को भी सरोवर का पट्टा होने की जानकारी नहीं थी।

एक माह पूर्व प्रेमचंद ने सरोवर में मछली पालन शुरू कर दिया। तालाब से मछली पकड़ कर उनकी बिक्री की जाने लगी तब संत हनुमान दास को इसकी जानकारी हुई। उन्होंने तालाब से मछली पकड़ने का विरोध किया। कहा, वह अपनी कुटिया के नजदीक जीव हत्या नहीं होने देंगे। उन्होंने पट्टा निरस्त कर तालाब को अमृत सरोवर के रूप में विकसित करने की प्रशासन से मांग की, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।

इससे नाराज संत हनुमान दास धरने पर बैठ गए। उनके समर्थन में क्षेत्र के 20 से ज्यादा साधु-संत धरने पर बैठे हैं। प्रशासन के मांग को गंभीरता से न लेने पर संत हनुमान दास ने पांच अक्तूबर को समाधि लेने की घोषणा कर दी है। रविवार को बीसलपुर विधायक विवेक वर्मा कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने साधु-संतों से वार्ता की और आश्वासन दिया कि अधिकारियों से वार्ता कर तालाब का पट्टा निरस्त कराएंगे।उन्होंने धरना खत्म करने के साथ ही संत हनुमान दास से समाधि लेने की घोषणा वापस लेने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया कि जब तक पट्टा निरस्त नहीं होता, धरना जारी रहेगा। संत हनुमान दास अब भी पांच अक्तूबर को समाधि लेने की अपनी घोषणा पर अडिग हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से संतों के आंदोलन को खत्म कराने की अब तक कोई पहल नहीं की गई है।


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