Pilibhit News: सचिवों ने साल भर तक बजट ही नहीं मांगा, गोआश्रय स्थलों में भूख से दम तोड़ते रहे पशु

कलीनगर गोआश्रय स्थल । संवाद
कलीनगर। कलीनगर तहसील क्षेत्र के गोआश्रय स्थलों में संरक्षित पशुओं के इलाज और खान-पान की व्यवस्था करने में सचिव ही लापरवाही बरत रहे हैं। उनके द्वारा चारा सहित अन्य मदों के लिए बजट की मांग का पत्र पशु चिकित्साधिकारी को एक साल दिया गया है। इस पर एसडीएम ने मुख्य विकास अधिकारी को पूरे मामले से अवगत कराते हुए सचिव पर कार्रवाई के लिए लिखा है।
छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के लिए गांवों में गोआश्रय स्थल बनाए गए हैं। यहां पशुओं के भरण पोषण के साथ ही देखभाल को लगे केयर टेकर के लिए शासन की ओर से धनराशि दी जाती है। कलीनगर तहसील क्षेत्र के गोआश्रय स्थलों में पशुओं की दुर्दशा का बड़ा मामला सामने आया है। शासन की ओर से मिलने वाले बजट के लिए सचिव की ओर से घोर लापरवाही की गई है।
इसका खुलासा तब हुआ जब पशु चिकित्साधिकारी की ओर से एसडीएम को तीन गोआश्रय स्थलों का 4.90 लाख रुपये का मांगपत्र दिया गया। इस मांगपत्र को देखकर उपजिला अधिकारी दंग रह गए। विलंब से आने का कारण पूछा तो पशु चिकित्साधिकारी ने बताया संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी के स्तर से ही उनको मांगपत्र देरी से मिला है। इस पर एसडीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए मुख्य विकास अधिकारी को भी पत्र लिखकर ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है।
सीडीओ को भेजे पत्र में उप जिलाधिकारी ने कहा है कि परशुराम गोआश्रय स्थल माधोटांडा में एक जनवरी 2023 से 31 मई 2023 तक सुरक्षित पशुओं, गोमती उद्गम स्थल के गोआश्रय स्थल हरिपुर फुलहर में एक अक्तूबर 2022 से 31 मई 2023 तक और शहगढ़ में एक नवंबर 2022 से 31 मई 2023 तक संरक्षित गोवंश के भरण पोषण के लिए धनराशि का मांगपत्र काफी देर से दिया गया है।
ग्राम पंचायत सचिवों की यह शिथिलता अत्यंत खेदजनक एवं पदेन दायित्वों के प्रति गंभीर लापरवाही है। एसडीएम आशुतोष गुप्ता ने बताया इस मामले में सीडीओ के स्तर से कार्रवाई को लेकर पत्र भेजा गया है।