रामपुर

Rampur : रजा लाइब्रेरी के 250वें स्थापना दिवस को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी, समारोह में आ सकते हैं पीएम मोदी

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Preparations to make the 250th foundation day of Raza Library historic

रजा लाइब्रेरी का इंटीरियर
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व प्रसिद्ध रजा लाइब्रेरी के 250 वें स्थापना दिवस को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। लाइब्रेरी का 250वां स्थापना दिवस अक्तूबर माह में मनाया जाएगा। स्थापना दिवस के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य कई शख्सियतों के भाग लेने की संभावना है। इसकी तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव गोबिंद मोहन 01 अगस्त को रामपुर आएंगे।

रामपुर के रजा लाइब्रेरी को पर्यटन की दृष्टि से विश्व पटल पर चमकाने के लिए अब इसके सुंदरीकरण की कवायद तेज कर दी गई है। इसको लेकर भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इसके बाद जनवरी महीने में केंद्रीय स्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव मुग्धा सिन्हा ने लाइब्रेरी का दौरा किया था। जुलाई माह के दौरान प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा ने भी रजा लाइब्रेरी का दौरा किया था। 

अब 01 अगस्त को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव रजा लाइब्रेरी का दौरा कर स्थापना दिवस की तैयारियों को लेकर किए जा रहे कार्यों का जाएजा लेंगे। मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि लाइब्रेरी का स्थापना दिवस मनाया जाना है। इसको लेकर लाइब्रेरी की बिल्डिंग के साथ-साथ यहां संरक्षित पांडुलिपियों की विशेषताओं के बारे में देश-दुनिया के लोगों को जानकारी देने की कवायद चल रही है। लाइब्रेरी में अभी कई स्तर पर कार्य कराए जाने हैं। लाइब्रेरी के स्थायी निदेशक की नियुक्ति भी जानी है। इन सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव यहां आ रहे हैं। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने बताया कि स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव से चर्चा की जाएगी।

लाइब्रेरी में संरक्षित हैं 17 हजार पांडुलिपियां और 60 हजार किताबें

रजा लाइब्रेरी के किताबी खजाने में 17 हजार पांडुलिपियां और 60 हजार किताबें हैं। इनमें हजरत अली के हाथ से हिरन की खाल पर लिखी कुरान है तो सुमेर चंद की फारसी में सोने के पानी से लिखी रामायण। इन दुर्लभ पांडुलिपियों को देखने और शोध कार्य के लिए दुनिया भर से लोग यहां आते हैं।


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